[1] यहोवा ह सासन करथे, धरती ह खुस होवय; दूरिहा-दूरिहा के समुंदर-तटमन आनंद मनावंय।
[2] बादर अऊ गहिरा अंधियार ओकर चारों कोति हवय; धरमीपन अऊ नियाय ओकर सिंघासन के नीव अंय।
[3] आगी ह ओकर आघू-आघू जाथे अऊ ओकर बईरीमन ला चारों कोति ले भसम कर देथे।
[4] ओकर बिजली ह संसार ला अंजोर कर देथे; धरती ह येला देखके कांपथे।
[5] पहाड़मन यहोवा के आघू म याने कि जम्मो धरती के परभू के आघू म मोम के सहीं टघल जाथें।
[6] अकास ह ओकर धरमीपन के बखान करथे, अऊ जम्मो मनखेमन ओकर महिमा ला देखथें।
[7] ओ जम्मो, जऊन मन बेकार के देवतामन के अराधना करथें, अऊ जऊन मन मूरतीमन ऊपर घमंड करथें, ओमन लज्जा म पड़थें; हे जम्मो देवतामन, परमेसर के अराधना करव!
[8] हे यहोवा, तोर नियाय के बात ला सुनके सियोन ह आनंदित होथे अऊ यहूदा के गांवमन खुस होथें।
[9] काबरकि हे यहोवा, तेंह जम्मो धरती के ऊपर सर्वोच्च परमेसर अस; तेंह जम्मो देवतामन ले बहुंत ऊपर उठाय गे हस।
[10] जऊन मन यहोवा ले मया करथें, ओमन बुरई ले घिन करंय, काबरकि ओह अपन बिसवासयोग्य जन के परान के रकछा करथे अऊ ओमन ला दुस्टमन के हांथ ले बचाथे।
[11] अंजोर ह धरमी ऊपर चमकथे अऊ ईमानदार मनखे के हिरदय म आनंद रहिथे।
[12] हे धरमी मनखेमन, यहोवा म आनंद मनावव, अऊ ओकर पबितर नांव के परसंसा करव।