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[1] हे परमेसर, तेंह मोर परमेसर अस, उत्सुक होके मेंह तोला खोजथंव; सूखा अऊ झुलसत भुइयां म जिहां पानी नइं ए, मेंह तोर पीयासा हंव, मोर पूरा सरीर तोर संगति के कामना करथे।

[2] मेंह पबितर-स्थान म तोला देखे हवंव अऊ तोर सामर्थ अऊ तोर महिमा ला निहारेंव।

[3] काबरकि तोर मया ह जिनगी ले जादा बने अय, मोर मुहूं ह तोर महिमा करही।

[4] जब तक मेंह जीयत हंव, मेंह तोर परसंसा करहूं, अऊ तोर नांव के महिमा म मेंह अपन हांथ उठाहूं।

[5] मानो बने जेवन ले मेंह पूरा संतुस्ट होहूं, अऊ मेंह मोर मुहूं ले गावत तोर परसंसा करहूं।

[6] अपन दसना म मेंह तोला सुरता करथंव; रथिया के बेरा मेंह तोर बारे म सोचथंव।

[7] काबरकि तेंह मोर मददगार अस, मेंह तोर डेना के छइहां म गाथंव।

[8] मेंह तोर संग लगे रहिथंव; तोर जेवनी हांथ ह मोला संभालथे।

[9] जऊन मन मोला मार डारे चाहथें, ओमन नास हो जाहीं; ओमन धरती के गहरई म दब जाहीं।

[10] ओमन तलवार ले मारे जाहीं अऊ सियारमन के जेवन बन जाहीं।

[11] पर राजा ह परमेसर म आनंद मनाही; ओ जम्मो जऊन मन परमेसर के सपथ खाथें, ओमन ओकर महिमा करहीं, जबकि लबरामन के मुहूं ला बंद करे जाही।

भजन-संहिता — Chapters