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[1] हे बलवान बीर, बुरई ऊपर काबर घमंड करथस? दिन भर काबर घमंड करत रहिथस, जबकि तेंह तो परमेसर के नजर म एक कलंक अस?

[2] तेंह धोखाधड़ी करथस, तोर जीभ ह बिनास के योजना बनाथे; येह तो धारवाले एक उस्तरा सहीं अय।

[3] तेंह भलई के बदले बुरई ले मया करथस, अऊ सच बोले के बदले लबारी मारे ला पसंद करथस।

[4] हे धोखा देवइया जीभ! तेंह हर हानि करइया बात ले मया करथस।

[5] खचित परमेसर ह तोला हमेसा बर नास कर दीही: ओह तोला धरके तोर डेरा ले निकाल दीही; ओह तोला जीयत मनखेमन के लोक ले उखान डारही।

[6] धरमी मनखेमन येला देखके डरहीं; ओमन ये कहिके तोर ऊपर हंसहीं,

[7] “इहां ये मनखे हवय जऊन ह परमेसर ला अपन मजबूत गढ़ नइं बनाईस पर अपन बहुंत धन-संपत्ति ऊपर भरोसा करिस अऊ आने मन ला नास करे के दुवारा मजबूत होवत गीस!”

[8] पर मेंह परमेसर के घर म बढ़त एक जैतून के रूख सहीं अंव; मेंह हमेसा-हमेसा बर परमेसर के अटूट मया ऊपर भरोसा रखथंव।

[9] जऊन कुछू तेंह करे हस, ओकर बर मेंह हमेसा तोर बिसवासयोग्य मनखेमन के आघू म तोर परसंसा करहूं। अऊ मेंह तोर नांव ऊपर आसा रखहूं, काबरकि तोर नांव ह बने ए।

भजन-संहिता — Chapters