Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 1:24

[1] हे मोर धरमी परमेसर, जब मेंह तोला बलावंव, त तेंह मोला जबाब दे। मोला मोर बिपत्ति म सहारा दे; मोर ऊपर दया कर अऊ मोर पराथना ला सुन।

[2] हे मनखेमन! तुमन कब तक मोर महिमा के बेजत्ती करत रहिहू? तुमन कब तक भरम ले मया करत रहिहू अऊ लबरा देवतामन के खोज म रहिहू?

[3] तुमन जान लव कि यहोवा ह अपन बिसवासयोग्य सेवक ला अपन बर अलग रखे हवय; जब मेंह यहोवा ला पुकारथंव, त ओह मोर बात ला सुनथे।

[4] कांपत रहव अऊ पाप झन करव; जब तुमन अपन दसना म रहिथव, त अपन मन ला जांचव अऊ चुप रहव।

[5] धरमीपन के बलिदान चघावव अऊ यहोवा ऊपर भरोसा रखव।

[6] बहुंते जन पुछत हवंय, “कोन ह हमर उन्नति करही?” हे यहोवा, तोर मुख के अंजोर हमर ऊपर चमका।

[7] जब ओमन के अनाज अऊ नवां अंगूर के मंद बहुंत होथे, त तेंह मोर मन ला आनंद ले भर दे।

[8] सांति से मेंह लेटहूं अऊ सुतहूं, काबरकि हे यहोवा, तेंहीच ह मोला सुरकछा म रखथस।

भजन-संहिता — Chapters