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[1] जाति-जाति के मनखेमन काबर हो-हल्ला मचाथें अऊ मनखेमन काबर बेकार म सडयंत्र रचथें?

[2] यहोवा अऊ ओकर अभिसिक्त जन के बिरूध धरती के राजामन ठाढ़ होथें अऊ सासन करइयामन ये कहिके एक संग जूरथें,

[3] “आवव, हमन ओमन के बेड़ीमन ला टोर दन अऊ ओमन के बंधना ला उतार फेंकन।”

[4] जऊन ह स्वरग के सिंघासन म बिराजे हवय, ओह हंसथे; परमेसर ह ओमन के ठट्ठा करथे।

[5] ओह गुस्सा होके ओमन ला डांटथे अऊ अपन कोप म ओमन ला ये कहिके डरवाथे,

[6] “मेंह अपन राजा ला अपन पबितर पहाड़ सियोन ऊपर बईठा दे हंव।”

[7] मेंह यहोवा के बिधि-बिधान के घोसना करहूं: ओह मोला कहिस, “तेंह मोर बेटा अस; आज मेंह तोर ददा बन गे हवंव।

[8] मोर ले मांग, अऊ मेंह जम्मो देसमन ला तोर संपत्ति होय बर, अऊ धरती के छोर तक के जगह ला तोर अधिकार म दे दूहूं।

[9] तेंह ओमन ला लोहा के छड़ ले टोर-फोर देबे; तेंह ओमन ला माटी के बरतन सहीं फोरके कुटा-कुटा कर देबे।”

[10] एकरसेति, हे राजामन, तुमन बुद्धिमान बनव; हे धरती के सासन करइयामन, सचेत रहव।

[11] भय के संग यहोवा के सेवा करव अऊ कांपत-कांपत ओकर सासन के खुसी मनावव।

[12] ओकर बेटा ला चूमव, नइं तो ओह गुस्सा हो जाही अऊ तुम्हर जिनगी ह तुमन ला बिनास कोति ले जाही, काबरकि छिन भर म ओकर कोप ह भड़क सकथे। धइन अंय ओमन, जेमन ओकर करा सरन लेथें।

भजन-संहिता — Chapters