[1] हे हमर परमेसर, सियोन म परसंसा ह तोर बाट जोहथे; तोर बर हमर दुवारा करे गे मन्नतमन पूरा करे जाहीं।
[2] तें, जऊन ह कि पराथना के जबाब देथस, तोर करा जम्मो मनखेमन आहीं।
[3] जब हमन बहुंत पाप ले बियाकुल हो जाथन, त तेंह हमर अपराधमन ला छेमा करथस।
[4] धइन अंय ओमन, जेमन ला तेंह चुनथस अऊ अपन अंगना म रहे बर ओमन ला लकठा म लानथस! हमन तोर घर के, तोर पबितर मंदिर के बने चीजमन ले भर गे हवन।
[5] हे परमेसर हमर उद्धार करइया, तेंह धरती के छोर अऊ दूरिहा समुंदर म रहइया जम्मो झन के आसा अस, तेंह हमन ला अद्भूत अऊ धरमी काम करके हमन ला जबाब देथस,
[6] तेंह अपनआप ला ताकत ले भरके, पहाड़मन ला अपन सामर्थ ले बनाय हस,
[7] तेंह समुंदर के गरजन ला, समुंदर के लहर के गरजन ला, अऊ देस-देस के कोलाहल ला सांत करथस।
[8] जम्मो धरती ह भय अऊ तोर अद्भूत काम ले भर गे हवय; जिहां तेंह बिहनियां के अंजोर अऊ सांझ के अंधियारा लानथस, तेंह आनंद के गीत गवाथस।
[9] तेंह भुइयां के खियाल रखथस अऊ ओला पानी ले पलोथस; तेंह येला बहुंत उपजाऊ बनाथस। परमेसर के पानी के सोतमन पानी ले भरे हवंय ताकि मनखेमन ला अनाज मिलय, काबरकि तेंह येला अइसे ठहिराय हस।
[10] तेंह येकर घारीमन ला भीगोथस अऊ येकर उभारमन ला समतल करथस; तेंह येला बारिस के पानी ले नरम करथस अऊ येकर फसल ला आसीस देथस।
[11] तेंह बछर ला बहुंत फसल ले भर देथस, अऊ बहुंत चीजमन के कारन तोर गाड़ीमन म जगह नइं रहय।
[12] निरजन जगह के भुइयांमन कांदी ले भर गे हवंय; पहाड़ीमन खुसी के चादर ओढ़े हवंय।
[13] चरागनमन पसुमन के झुंड ले भर गे हवंय अऊ घाटीमन अनाज ले ढंक गे हवंय; ओमन आनंद के मारे जय-जयकार करथें अऊ गीत गाथें।