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[1] महान ए यहोवा, अऊ हमर परमेसर के सहर म, ओकर पबितर पहाड़ म, ओह सबले जादा परसंसा के योग्य अय।

[2] सुघर हे अपन ऊंचई म अऊ येह जम्मो धरती के आनंद ए, सपोन के ऊंचई के सहीं हवय सियोन परबत, जऊन ह महाराजा के सहर अय।

[3] परमेसर ह उहां के किलामन म हवय; ओह अपनआप ला ओकर गढ़ के रूप म देखाय हवय।

[4] जब राजामन अपन सेना ला मिलाईन, जब ओमन एक संग आघू बढ़िन,

[5] त ओमन ओला देखिन अऊ चकित हो गीन; अऊ ओमन डर के मारे भाग गीन।

[6] ओमन उहां कांपे लगिन, ओमन ला छेवारी होवत माईलोगन के सहीं पीरा होईस।

[7] तेंह ओमन ला तरसीस के पानी जहाजमन सहीं नास कर देय याने कि पुरवई हवा ले ओमन ला चकनाचूर कर देय।

[8] सर्वसक्तिमान यहोवा के सहर म, हमर परमेसर के सहर म जइसे हमन सुने हन जइसे हमन देखे हन: परमेसर ह ओला सदाकाल बर सुरकछित बनाथे।

[9] हे परमेसर, तोर मंदिर के भीतर हमन तोर अब्बड़ मया ऊपर चिंतन-मनन करथन।

[10] हे परमेसर, तोर नांव के सहीं, तोर परसंसा ह धरती के छोर तक हबरत हे; तोर जेवनी हांथ ह धरमीपन ले भरे हवय।

[11] तोर नियाय के काम के कारन सियोन परबत आनंद मनावत हे, अऊ यहूदा के बस्तीमन म खुसी हवय।

[12] सियोन करा जावव, ओकर चारों कोति चक्कर लगावव, ओकर गुम्मटमन के गनती करव।

[13] ओकर मजबूत दीवारमन ऊपर बने करके बिचार करव, ओकर महलमन ला धियान से देखव, ताकि अवइया पीढ़ी के मनखेमन ला तुमन ओमन के बारे म बता सकव।

[14] काबरकि ये परमेसर ह हमर सदाकाल के परमेसर अय; ओहीच ह आखिरी तक हमर अगुवई करही।

भजन-संहिता — Chapters