[1] हे परमेसर, मोर मन ह अटल हवय; मेंह अपन पूरा आतमा ले गीत गाहूं अऊ बाजा बजाहूं।
[2] हे बीना अऊ सारंगी, जागव! मेंह बड़े बिहनियां ला जगाहूं।
[3] हे यहोवा, मेंह जाति-जाति के मनखेमन के बीच म तोर परसंसा करहूं; मेंह मनखेमन के बीच म तोर गीत गाहूं।
[4] काबरकि तोर मया ह अतेक महान ए कि ओह स्वरग ले घलो ऊंच हवय; तोर बिसवासयोग्यता ह अकास तक हबरत हवय।
[5] हे परमेसर, तोर महिमा ह स्वरगमन ले घलो ऊपर होवय; तोर महिमा ह जम्मो धरती ऊपर होवय।
[6] अपन जेवनी हांथ उठाके हमन ला बचा अऊ हमर मदद कर, ताकि जऊन मन तोर ले मया करथें, ओमन छोंड़ाय जावंय।
[7] परमेसर ह अपन पबितर-स्थान ले कहे हवय: “जीत के खुसी म, मेंह सकेम ला बांट दूहूं अऊ सुक्कोत के घाटी ला नापहूं।
[8] गिलाद ह मोर ए, मनस्से ह घलो मोर ए; एपरैम ह मोर मुड़ के टोप ए, यहूदा ह मोर राजदंड ए।
[9] मोआब ह मोर हांथ-मुहूं धोए के बरतन ए, एदोम ऊपर मेंह अपन पनही ला उछालहूं; पलिस्ती ऊपर मेंह जीत के खुसी म चिचियाहूं।”
[10] कोन ह मोला गढ़वाले सहर म लानही? कोन ह मोला एदोम देस ले जाही?
[11] हे परमेसर, का ये तें नो हस, तें जऊन ह हमन ला अस्वीकार करे हस अऊ अब हमर सेना के संग नइं जावस?
[12] बईरीमन के बिरूध हमर मदद कर, काबरकि मनखे के दिये मदद ह बेकार ए।
[13] परमेसर के मदद ले ही हमन बिजयी होबो, अऊ ओह हमर बईरीमन ला कुचर दीही।