[1] मुरूख ह अपन मन म कहिथे, “परमेसर नइं ए।” ओमन बिगड़ गे हवंय, ओमन दुस्टता के काम करथें; अइसे कोनो नइं ए, जऊन ह भलई करथे।
[2] यहोवा ह स्वरग ले जम्मो मानव-जाति ला ये आसा म देखथे कि कोनो समझदार हवय कि नइं, कोनो परमेसर के खोज करथे कि नइं।
[3] जम्मो झन भटक गे हवंय, जम्मो झन बिगड़ गे हवंय; अइसे कोनो नइं ए, जऊन ह भलई करथे, एको झन घलो नइं।
[4] का ये जम्मो दुस्ट काम करइयामन कुछू नइं जानंय? ओमन मोर मनखेमन ला अइसे खा जाथें, मानो कि रोटी खावत हें; ओमन कभू यहोवा के नांव तक नइं लेवंय।
[5] पर उहां, ओमन डर के मारे घबरा गे हवंय, काबरकि परमेसर ह धरमीमन के संग हवय।
[6] दुस्ट काम करइयामन, तुमन गरीबमन के योजना ला बेकार कर देथव, पर यहोवा ह ओमन के सरन-स्थान अय।
[7] बने होतिस कि इसरायल बर उद्धार ह सियोन ले बाहिर आतिस! जब यहोवा ह अपन मनखेमन ला पहिले के सहीं कर देथे, याकूब ह आनंद मनावय अऊ इसरायल ह खुस होवय!