[1] सही म मोर जीव ला परमेसर म अराम मिलथे; मोर उद्धार ओकर करा ले आथे।
[2] सही म ओह मोर चट्टान अऊ मोर उद्धार ए; ओह मोर गढ़ ए, मेंह कभू नइं डगमगाहूं।
[3] कब तक तुमन मोर ऊपर हमला करत रहिहू? का तुमन जम्मो झन मोला खाल्हे फटिक दूहू— में तो झुके दीवार, गिरत बाड़ा के सहीं अंव?
[4] खचित ओमन मोला मोर ऊंच जगह ले गिराय के इरादा रखथें; ओमन लबारी मारे म खुस होथें। अपन मुहूं ले ओमन आसीस देथें, पर अपन मन म सराप देथें।
[5] हव, मोर जीव ला परमेसर म अराम मिलथे; ओकर ऊपर मोर आसा हवय।
[6] सही म ओह मोर चट्टान अऊ मोर उद्धार ए; ओह मोर गढ़ ए, मेंह नइं डगमगाहूं।
[7] मोर उद्धार अऊ मोर आदर परमेसर ऊपर निरभर हवय; ओह मोर मजबूत चट्टान, मोर सरन-स्थान ए।
[8] हे मनखेमन, ओकर ऊपर हर समय भरोसा रखव; ओकर आघू म अपन बात खुले मन से कहव, काबरकि परमेसर ह हमर सरन-स्थान ए।
[9] सही म नीच कुल म जनमे मनखेमन सिरिप एक सांस अंय, अऊ ऊंच कुल म जनमे मनखेमन सिरिप एक लबारी अंय। कहूं ओमन ला तराजू म तऊले जावय, त ओमन के कुछू वजन नइं ए; एक संग ओमन सिरिप एक सांस अंय।
[10] अनुचित वसूली ऊपर भरोसा झन करव या चोरी के चीज म आसा झन रखव; हालाकि तुम्हर संपत्ति बढ़थे, पर ओमा अपन मन झन लगावव।
[11] परमेसर ह एक बात कहे हवय, दू बात मेंह सुने हवंव: “हे परमेसर, सामर्थ ह तोर अय,
[12] अऊ हे परभू, तोर म अब्बड़ मया हवय”; अऊ, “तेंह हर एक जन ला ओमन के काम के मुताबिक ईनाम देथस।”