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[1] आवव, हमन यहोवा बर आनंद के गीत गावन; हमन हमर उद्धार के चट्टान बर जोर से चिचियावन।

[2] हमन ओकर आघू म धनबाद के संग आवन अऊ बाजा बजाके अऊ गीत गाके ओकर बहुंत परसंसा करन।

[3] काबरकि यहोवा ह महान परमेसर ए, जम्मो देवतामन ऊपर महान राजा ए।

[4] ओकर हांथ म धरती के गहरई हवय, अऊ पहाड़ के चोटीमन ओकर अंय।

[5] समुंदर ह ओकर अय, काबरकि ओह येला बनाय हवय, अऊ ओकर हांथमन सूखा भुइयां ला रचे हवंय।

[6] आवव, हमन मुड़ नवाके अराधना करन, हमन यहोवा हमर सिरजनहार के आघू म माड़ी टेकन;

[7] काबरकि ओह हमर परमेसर ए अऊ हमन ओकर चरागन के मनखे अन, अऊ ओकर देखरेख म रहइया एक झुंड अन। यदि आज तुमन सिरिप ओकर ये अवाज ला सुनत हव,

[8] “त अपन हिरदय ला कठोर झन करव, जइसे तुम्हर पुरखामन मरीबा म करे रिहिन, जइसे कि तुमन ओ दिन सुन्ना जगह के मस्सा म करे रहेव,

[9] जिहां ओमन मोला परखिन; ओमन मोला जांचिन, हालाकि ओमन मोर काममन ला देखे रिहिन।

[10] चालीस साल तक मेंह ओ पीढ़ी के मनखेमन ले नराज रहेंव; मेंह कहेंव, ‘येमन अइसे मनखे अंय, जेमन के मन ह एती-ओती होथे, अऊ ओमन मोर रसता ला नइं जानंय।’

[11] एकरसेति मेंह कोरोध म कसम खाके कहेंव, ‘ओमन ओ ठऊर म कभू नइं जा सकहीं, जिहां मेंह ओमन ला अराम देवइया रहेंव।’ ”

भजन-संहिता — Chapters