Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:27

[1] हे मोर परमेसर, तें जेकर मेंह परसंसा करथंव, चुपेचाप झन रह,

[2] काबरकि दुस्ट अऊ धोखा देवइया मनखेमन मोर बिरूध म गोठियावत हवंय; ओमन मोर बिरूध लबारी बात कहत हवंय।

[3] घिनौना बचन ले ओमन मोला घेरत हवंय; ओमन बिगर कारन के मोर ऊपर हमला करथें।

[4] ओमन के संग मेंह संगी के बरताव करंय, पर बदला म ओमन मोर ऊपर दोस लगावत हें, पर मेंह पराथना करत रहइया मनखे अंव।

[5] ओमन मोर भलई के बदले मोर संग बुरई करथें, अऊ संगी बरताव के बदले मोर ले घिन करथें।

[6] मोर बईरी के बिरोध करे बर कोनो दुस्ट मनखे ला ठहिरा दे; ओकर जेवनी हांथ कोति एक दोस लगइया ठाढ़ होवय।

[7] जब ओकर नियाय करे जावय, त ओह अपराधी ठहिरय, अऊ पराथनामन ओला दोसी ठहिरावंय।

[8] ओकर उमर ह थोरकन दिन के होवय; ओकर अगुवई के पद ला कोनो अऊ ले लेवय।

[9] ओकर लइकामन अनाथ हो जावंय अऊ ओकर घरवाली ह बिधवा हो जावय।

[10] ओकर लइकामन एती-ओती घुमत भिखारी हो जावंय; ओमन ला ओमन के उजाड़ घर ले भगा दिये जावय।

[11] साहूकार ह ओकर जम्मो चीज ला जपत कर ले; अजनबीमन ओकर मेहनत के फर ला लूट लेवंय।

[12] ओकर ऊपर कोनो दया झन देखावय या ओकर अनाथ लइकामन ऊपर तरस झन खावय।

[13] ओकर संतानमन खतम हो जावंय, अगला पीढ़ी ले ओमन के नामोनिसान मिट जावय।

[14] यहोवा के आघू म ओकर पुरखामन के दुस्टता ला लाने जावय; ओकर दाई के पाप ला कभू झन मिटाय जावय।

[15] ओमन के पापमन यहोवा के आघू म हमेसा बने रहंय, ताकि ओह ओमन के नांव धरती ले मिटा देवय।

[16] काबरकि ओ दुस्ट ह कभू दया करे के बात नइं सोचिस, पर गरीब अऊ जरूरतमंद अऊ दुखी मनखेमन ला पीछा करके मार डारिस।

[17] सराप देवई ओला बहुंत बने लगिस— ओ सराप ह लहुंटके ओहीच ला लगय। ओला आसीस म कोनो खुसी नइं मिलिस— येह ओकर ले बहुंत दूरिहा रहय।

[18] सराप देवई ओकर बर कपड़ा पहिरे सहीं हो गीस; येह ओकर देहें म पानी हमाय सहीं, अऊ ओकर हाड़ामन म तेल सहीं हो गीस।

[19] येह ओकर देहें म ओढ़ना ओढ़े सहीं, अऊ ओकर कनिहां म हमेसा एक कमरपट्टा बांधे सहीं होवय।

[20] मोर ऊपर दोस लगइयामन ला, मोर बुरई करइयामन ला यहोवा ले येहीच बदला मिलय।

[21] पर हे परमपरधान यहोवा, अपन नांव के हित म मोर मदद कर; अपन मया के भलई के कारन मोला छुटकारा दे।

[22] काबरकि मेंह गरीब अऊ जरूरतमंद अंव, अऊ मोर भीतर म मोर हिरदय ला चोट लगे हवय।

[23] मेंह सांझ के छइहां सहीं खतम होवत हंव; मोला फांफा सहीं झटकार दिये गे हवय।

[24] उपास करत मोर माड़ीमन दुरबल होवत हें; मोर देहें ह पातर अऊ कमजोर हो गे हवय।

[25] मेंह अपन दोस लगइयामन बर हंसी के पात्र हो गे हवंव; जब ओमन मोला देखथें, त ओमन अपन मुड़ हलाथें।

[26] हे यहोवा मोर परमेसर, मोर मदद कर; अपन अटूट मया के मुताबिक मोर उद्धार कर।

[27] ओमन जानंय कि एकर पाछू तोर हांथ हवय, अऊ ये कि हे यहोवा, येला तेंह करे हस।

[28] जब ओमन सराप देवंय, त तें आसीस दे; जऊन मन मोर ऊपर हमला करथें, ओमन सरमिंदा होवंय, पर तोर सेवक ह आनंद मनावय।

[29] मोर ऊपर दोस लगइयामन ला कलंक के कपड़ा पहिराय जावय अऊ ओढ़ना लपेटे सहीं ओमन लज्जा म लपेटे जावंय।

[30] अपन मुहूं ले मेंह यहोवा के बहुंत धनबाद करहूं; अराधना करइयामन के बड़े भीड़ म मेंह ओकर परसंसा करहूं।

[31] काबरकि ओह जरूरतमंद के जेवनी हांथ कोति ठाढ़ होथे, ताकि ओह ओमन के जिनगी ला ओमन ले बचावय, जेमन ओमन ला अपराधी ठहिराहीं।

भजन-संहिता — Chapters