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[1] जइसे हिरन ह पानी के सोता बर हांफथे, हे मोर परमेसर, वइसे ही मोर जीव ह तोर बर हांफथे।

[2] मोर जीव ह परमेसर बर, जीयत परमेसर बर पीयासा हवय। कब मेंह जाके परमेसर संग मिल सकत हंव?

[3] रात अऊ दिन मेंह अपन आंखी के आंसू ला पीयत हंव, जबकि दिन भर मनखेमन मोला कहिथें, “कहां हवय तोर परमेसर?”

[4] जब मेंह अपन मन के बात ला रखथंव, त मोला ये बातमन सुरता आथें: मेंह कइसे उत्सव मनावत भीड़ के संग परमेसर के सुरकछा म आनंद अऊ परसंसा के जय-जयकार करत परमेसर के घर म जाय के आदि रहेंव।

[5] हे मोर मन, तेंह काबर उदास होवत हस? तेंह भीतरे-भीतर काबर बियाकुल हस? परमेसर ऊपर अपन आसा रख, काबरकि मेंह अब भी मोर उद्धारकर्ता अऊ मोर परमेसर के परसंसा करहूं।

[6] मोर मन ह भीतरे-भीतर उदास हवय; एकरसेति यरदन के देस ले, हेरमोन के ऊंचई—मिसार पहाड़ ले मेंह तोला सुरता करहूं।

[7] तोर जल-परपात के गरजन म गहरई ह गहरई ला पुकारथे; तोर जम्मो पानी के उफान अऊ लहरामन मोर ऊपर ले निकले हवंय।

[8] दिन के बेरा यहोवा ह अपन मया देखाथे, अऊ रथिया मेंह ओकर गीत गाथंव— मोर जिनगी के परमेसर बर पराथना के गीत।

[9] मेंह परमेसर अपन चट्टान ला कहिथंव, “तेंह काबर मोला भुला गे हस? बईरीमन के दुवारा सताय जाके मेंह काबर सोक मनावंव?”

[10] जब मोर बईरीमन ये कहिके दिन भर मोला ताना मारथें, “कहां हे तोर परमेसर?” त मोर हाड़ामन पीरा म चूर-चूर हो जाथें।

[11] हे मोर मन, तेंह काबर उदास होवत हस? मोर भीतरे-भीतर काबर अतेक बियाकुल हस? परमेसर ऊपर अपन आसा रख, काबरकि मेंह अब भी मोर उद्धारकर्ता अऊ मोर परमेसर के परसंसा करहूं।

भजन-संहिता — Chapters