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[1] सक्तिसाली परमेसर, यहोवा ह उदयाचल ले लेके अस्ताचल तक धरती के मनखेमन ले गोठियाथे अऊ ओमन ला बलाथे।

[2] सियोन ले, जेह अब्बड़ सुघर हे, परमेसर के अंजोर चमकत हे।

[3] हमर परमेसर ह आथे अऊ ओह चुपेचाप नइं रहय; ओकर आघू म एक भसम करइया आगी, अऊ ओकर चारों कोति एक भयंकर आंधी हवय।

[4] ओह अपन मनखेमन के नियाय करे बर ऊपर ले अकास, अऊ धरती ला बलाथे:

[5] “ये मोर भक्तमन ला मोर करा इकट्ठा करव, जेमन बलिदान चघाके मोर संग करार करे हवंय।”

[6] अऊ स्वरग ह ओकर धरमीपन के घोसना करत हे, काबरकि ओह नियाय के परमेसर अय।

[7] “हे मोर मनखेमन, सुनव, अऊ मेंह गोठियाहूं; हे इसरायल, मेंह तोर बिरूध गवाही दूहूं: मेंह परमेसर अंव, तोर परमेसर।

[8] मेंह तोर बलिदान के बारे म या ओ होम-बलिदान के बारे म तोर ऊपर दोस नइं लगावंव, जेला हमेसा मोला चढ़ाय जाथे।

[9] मोला तोर घर ले बईला या तोर बाड़ा ले बोकरा के जरूरत नइं ए,

[10] काबरकि जंगल के हर एक पसु मोर अय, अऊ हजारों पहाड़ीमन ऊपर चरत जानवर घलो मोरेच अंय।

[11] मेंह पहाड़मन के जम्मो चिरईमन ला जानथंव, अऊ मैदान के कीड़ा-मकोड़ामन मोरेच अंय।

[12] यदि मेंह भूखा होतेंव, त मेंह तोला नइं कहितेंव, काबरकि संसार अऊ ओमा के जम्मो चीजमन मोर अंय।

[13] का मेंह सांड़मन के मांस खाथंव या बोकरामन के लहू पीथंव?

[14] “परमेसर ला धनबाद रूपी भेंट चघा, सर्वोच्च परमेसर बर अपन मन्नतमन ला पूरा कर,

[15] संकट के बेरा म मोला पुकार; मेंह तोला छुड़ाहूं, अऊ तेंह मोर आदरमान करबे।”

[16] पर दुस्ट मनखे ला परमेसर ह कहिथे: “मोर कानूनमन के पाठ करे के या मोर करारमन ला बताय के तोला का अधिकार हवय?

[17] तेंह तो मोर सिकछा ले घिन करथस अऊ मोर बचन ला तुछ समझथस।

[18] जब तेंह कोनो चोर ला देखथस, त ओकर संग सामिल हो जाथस; तेंह बेभिचारीमन के संग भागी होथस।

[19] तोर मुहूं ले बुरई के बात निकलथे अऊ तोर जीभ ह छल-कपट के बात करथे।

[20] तेंह बईठके अपन भाई के बिरूध गोठियाथस अऊ अपन ही सगा भाई के निन्दा करथस।

[21] जब तेंह ये काममन ला करय अऊ मेंह चुप रहेंव, त तेंह समझे कि मेंह घलो बिलकुल तोर सहीं अंव। पर मेंह अब तोर गलतीमन ला बतात हंव अऊ तोर आघू म तोर दोसमन ला रखत हंव।

[22] “तुमन, जेमन परमेसर ला भुला जाथव, येकर बारे म बिचार करव, नइं तो मेंह तुमन ला चीरके कुटा-कुटा कर दूहूं, अऊ तुमन ला बचानेवाला कोनो नइं होही:

[23] जऊन मन मोला धनबाद-बलिदान चघाथें, ओमन मोर आदर करथें, अऊ निरदोस मनखे ला मेंह अपन उद्धार के अनुभव कराहूं।”

भजन-संहिता — Chapters