Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 3:07

[1] मेंह हर समय यहोवा के परसंसा करहूं; ओकर परसंसा हमेसा मोर मुहूं ले होवत रहिही।

[2] मेंह यहोवा ऊपर घमंड करहूं; दुखित-पीड़ित मनखेमन सुनंय अऊ आनंद मनांय।

[3] मोर संग यहोवा के महिमा करव; आवव, हमन मिलके ओकर नांव के परसंसा करन।

[4] मेंह यहोवा ले पराथना करेंव; अऊ ओह मोला जबाब दीस; ओह मोला मोर जम्मो डर ले मुक्त करिस।

[5] जऊन मन ओकर कोति देखथें, ओमन दीप्तिमान होथें; ओमन कभू लज्जित नइं होवंय।

[6] ये दीन-हीन मनखे ह पुकारिस, अऊ यहोवा ह ओकर बात ला सुनिस; ओह ओला ओकर जम्मो दुख-तकलीफ ले बचाईस।

[7] यहोवा के स्वरगदूत ह ओमन के चारों कोति डेरा डालथे, जऊन मन ओकर भय मानथें, अऊ ओह ओमन ला छुड़ाथे।

[8] परखके देखव कि यहोवा ह बने अय; धइन अय ओ मनखे, जऊन ह ओकर करा सरन लेथे।

[9] हे ओकर पबितर मनखेमन, तुमन यहोवा के भय मानव, काबरकि जऊन मन ओकर भय मानथें, ओमन ला कुछू चीज के घटी नइं होवय।

[10] भले ही सिंह ह कमजोर हो सकथे अऊ भूखा रह सकथे, पर जऊन मन यहोवा के खोज म रहिथें, ओमन ला कोनो बने चीज के घटी नइं होवय।

[11] हे मोर लइकामन, आवव, मोर बात ला सुनव; मेंह तुमन ला यहोवा के भय मानना सिखोहूं।

[12] तुमन म ले जऊन ह भी जिनगी ले मया करथे अऊ बहुंते बने दिनमन ला देखे के ईछा करथे,

[13] त ओह अपन जीभ ला खराप बात ले अऊ अपन मुहूं ला लबारी बात ले दूरिहा रखय।

[14] बुरई ला छोंड़के भलई करव; सांति के खोज म रहव अऊ ओकर पाछू लगे रहव।

[15] यहोवा के नजर ह धरमीमन ऊपर लगे रहिथे, अऊ ओकर कान ह ओमन के गोहार के तरफ लगे रहिथे;

[16] पर यहोवा ह बुरई करइयामन के बिरोध करथे, ताकि ओह ओमन के नांव ला धरती ले मिटा देवय।

[17] धरमीमन गोहारथें, अऊ यहोवा ह ओमन के सुनथे; ओह ओमन ला ओमन के जम्मो समस्या ले बाहिर निकालथे।

[18] यहोवा ह टूटे मनवाला के लकठा म रहिथे अऊ ओमन के उद्धार करथे, जऊन मन आतमा म बहुंत दुखी होथें।

[19] धरमी मनखे करा बहुंत समस्या हो सकथे, पर यहोवा ह ओला ओकर जम्मो समस्या ले निकालथे;

[20] ओह ओकर जम्मो हाड़ामन के रकछा करथे, ओमा के एको ठन घलो नइं टूटय।

[21] बुरई ही दुस्ट मनखे ला मार डालही; धरमी जन के बईरीमन दोसी ठहिरहीं।

[22] यहोवा ह अपन सेवकमन ला बचाही; अऊ जऊन ह ओकर करा सरन लेथे, ओह दोसी नइं ठहिरही।

भजन-संहिता — Chapters