[1] स्वरग ह परमेसर के महिमा के बखान करत हे; अकास ह ओकर हांथ के काम ला परगट करत हे।
[2] हर दिन ओमन बखान करथें; हर रथिया ओमन गियान परगट करथें।
[3] ओमन के कोनो बोली नइं ए, ओमन कोनो सबद के उपयोग नइं करंय; ओमन ले कोनो अवाज सुनई नइं देय।
[4] तभो ले ओमन के अवाज जम्मो धरती म जाथे, ओमन के सबद संसार के छोर तक हबरथे। अकास म परमेसर ह सूरज बर एक तम्बू ताने हवय।
[5] येह एक दूल्हा के अपन कमरा ले बाहिर निकलके आय सहीं ए, येह एक बिजेता के सहीं अय, जऊन ह अपन दऊड़ ला दऊड़े बर आनंदित हे।
[6] येह अकास के एक छोर ले निकलथे अऊ दूसर छोर तक चक्कर लगाथे; जम्मो चीज ला येकर गरमी मिलथे।
[7] यहोवा के कानून ह बिलकुल सही ए, अऊ येह आतमा ला ताजा कर देथे। यहोवा के बिधिमन भरोसा के लईक अंय, अऊ येमन सधारन मनखे ला बुद्धिमान बना देथें।
[8] यहोवा के उपदेसमन सही अंय, अऊ येमन हिरदय ला आनंदित करथें। यहोवा के हुकूममन चमकीला एं, अऊ येमन आंखी ला अंजोर देथें।
[9] यहोवा के भय ह सुध ए, अऊ येह सदाकाल तक बने रहिथे। यहोवा के नियममन पक्का अंय, अऊ ये जम्मो के जम्मो नियाय के अंय।
[10] ओमन सोन ले घलो, सुध सोन ले घलो कीमती अंय; ओमन मंधरस ले घलो, मधुमक्खी के छत्ता के मंधरस ले घलो जादा मीठ अंय।
[11] ओमन के दुवारा तोर सेवक ला चेतउनी मिलथे; ओमन के पालन करे ले बड़े ईनाम मिलथे।
[12] पर अपन खुद के गलती ला कोन समझ सकथे? मोर छिपे गलतीमन ला छेमा कर।
[13] अपन सेवक ला जानबूझके करइया पाप ले दूरिहा रख; ओमन के अधिकार मोर ऊपर झन होवय। तब मेंह निरदोस होहूं, अऊ बड़े अपराध के दोसी नइं होहूं।
[14] हे यहोवा, मोर चट्टान अऊ मोर छुड़इया, मोर मुहूं के ये बचन अऊ मोर मन के ये बिचार तोला भावय।