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[1] जऊन ह सर्वोच्च परमेसर के सरन म रहिही, ओह सर्वसक्तिमान के छइहां म अराम करही।

[2] मेंह यहोवा के बारे म कहिहूं, “ओह मोर सरन-स्थान अऊ मोर गढ़ अय। मोर परमेसर, जेकर ऊपर मेंह भरोसा करथंव।”

[3] खचित ओह तोला चिड़ीमार के फंदा अऊ घातक महामारी ले बचाही।

[4] ओह अपन पांखी के खाल्हे म तोला ढांप लीही, अऊ ओकर डेनामन के खाल्हे म तोला सरन मिलही; ओकर बिसवासयोग्यता ह तोर ढाल अऊ झिलम होही।

[5] रथिया के आतंक ले तोला डर नइं होही, न ही ओ तीर ले डरबे, जेला दिनमान छोंड़े जाथे,

[6] न ही ओ महामारी ले, जऊन ह छिपके पीछा करथे, न ही ओ महारोग ले, जऊन ह दिन-दुपहरी म नास करथे।

[7] तोर बाजू म एक हजार, अऊ जेवनी हांथ कोति दस हजार गिर सकथें, पर येह तोर लकठा म नइं आही।

[8] तेंह अपन आंखी ले सिरिप देखत रहिबे अऊ दुस्टमन के दंड ला देखबे।

[9] कहूं तेंह कहिथस, “यहोवा ह मोर सरन-स्थान ए,” अऊ तेंह सर्वोच्च परमेसर ला अपन निवास बनाथस,

[10] त तोला कोनो हानि नइं होही, अऊ तोर डेरा के लकठा म कोनो बिपत्ति नइं आही।

[11] काबरकि ओह तोर बारे म अपन स्वरगदूतमन ला हुकूम दीही कि ओमन हर काम म तोर रकछा करंय;

[12] ओमन तोला अपन हांथ म उठा लीहीं, ताकि तोर गोड़ म पथरा ले चोट झन लगय।

[13] तेंह सिंह अऊ नाग सांप ला गोड़ ले कुचरबे; तेंह बड़े सिंह अऊ बड़े सांप ला कुचरबे।

[14] यहोवा ह कहिथे, “काबरकि ओह मोर ले मया करथे, मेंह ओला छोंड़ाहूं; मेंह ओला बचाहूं, काबरकि ओह मोर नांव ला मानथे।

[15] ओह मोला पुकारही, अऊ मेंह ओला जबाब दूहूं; संकट के बेरा म मेंह ओकर संग रहिहूं, मेंह ओला छोंड़ाहूं अऊ ओला आदर दूहूं।

[16] बहुंत उमर देके ओकर मन ला मेंह संतोस करहूं अऊ ओला अपन उद्धार के दरसन कराहूं।”

भजन-संहिता — Chapters