Listen to this chapter • 1:05
[1] परमेसर के सभा म परमेसर ही सभापति होथे; ओह “देवतामन” के बीच म नियाय करथे:
[2] “तुमन कब तक अनियायीमन के बचाव करते रहिहू अऊ दुस्टमन के समरथन करत रहिहू?
[3] दुरबल अऊ अनाथमन के बचाव करव; गरीब अऊ दुखीमन के मामला के समरथन करव।
[4] दुरबल अऊ जरूरतमंद के बचाव करव; दुस्टमन के हांथ ले ओमन ला छोंड़ावव।
[5] “ ‘देवतामन’ कुछू नइं जानंय, ओमन कुछू नइं समझंय। ओमन अंधियार म चलथें-फिरथें; धरती के जम्मो नीवमन हालत हें।
[6] “मेंह कहेंव, ‘तुमन “ईस्वर” अव; तुमन जम्मो सर्वोच्च परमेसर के बेटा अव।’
[7] पर तुमन सिरिप मरनहार मनखे सहीं मरहू; तुम्हर गिरई ह आने सासन करइया सहीं होही।”
[8] हे परमेसर, उठ, धरती के नियाय कर, काबरकि जम्मो जाति के मनखेमन तोर भाग एं।
भजन-संहिता — Chapters
11:1221:5831:1341:2452:2561:3272:4381:2693:15103:13111:15121:26131:01141:23151:02161:53172:49187:47192:34201:32212:14225:13231:05241:36253:04261:38272:40281:47291:40301:59314:15322:04333:07343:07354:50362:02376:04383:08392:51403:39412:12422:25431:17444:26453:16461:57471:29482:16493:18503:28512:52521:42531:24541:09553:47562:11572:07582:01593:11602:01611:16622:14631:44641:46652:36663:08671:11686:21696:14701:07714:22723:07733:58744:00751:45761:45772:497811:10792:24802:45812:19821:05832:26842:03851:46862:45871:02882:30897:23902:29912:15922:02930:58943:04951:41961:58971:44981:32991:371000:501011:251023:381033:021045:071056:101066:481075:331081:481094:271101:131111:361121:341131:081141:041152:341162:311170:261184:0811920:241200:571211:011221:141230:481241:041251:001260:591271:071281:001291:141301:151310:471322:351330:421340:291353:021363:191371:341381:261393:411401:591411:591421:191432:101442:341453:071461:381472:511482:151491:241501:01