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[1] परमेसर के सभा म परमेसर ही सभापति होथे; ओह “देवतामन” के बीच म नियाय करथे:

[2] “तुमन कब तक अनियायीमन के बचाव करते रहिहू अऊ दुस्टमन के समरथन करत रहिहू?

[3] दुरबल अऊ अनाथमन के बचाव करव; गरीब अऊ दुखीमन के मामला के समरथन करव।

[4] दुरबल अऊ जरूरतमंद के बचाव करव; दुस्टमन के हांथ ले ओमन ला छोंड़ावव।

[5] “ ‘देवतामन’ कुछू नइं जानंय, ओमन कुछू नइं समझंय। ओमन अंधियार म चलथें-फिरथें; धरती के जम्मो नीवमन हालत हें।

[6] “मेंह कहेंव, ‘तुमन “ईस्वर” अव; तुमन जम्मो सर्वोच्च परमेसर के बेटा अव।’

[7] पर तुमन सिरिप मरनहार मनखे सहीं मरहू; तुम्हर गिरई ह आने सासन करइया सहीं होही।”

[8] हे परमेसर, उठ, धरती के नियाय कर, काबरकि जम्मो जाति के मनखेमन तोर भाग एं।

भजन-संहिता — Chapters