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[1] हे परमेसर, राजा ला नियाय के बात बता, राजा के बेटा ला अपन धरमीपन दे।

[2] ओह तोर मनखेमन के नियाय धरमीपन ले अऊ दुख म परे तोर मनखेमन के नियाय सही-सही करे।

[3] पहाड़मन ले मनखेमन के उन्नति होवय, अऊ पहाड़ीमन ले धरमीपन के फर मिलय।

[4] मनखेमन के बीच दुखियारीमन के ओह बचाव करे अऊ जरूरतमंद मनखेमन के लइकामन ला बचावय; सतानेवालामन ला ओह कुचर दे।

[5] जब तक सूरज अऊ चंदा हवंय, पीढ़ी-पीढ़ी तक ओह बने रहय।

[6] ओह कांदी कटे भुइयां म बारिस के होवई, अऊ धरती म पानी के फुहार पड़े सहीं होवय।

[7] ओकर समय म धरमीमन उन्नति करंय अऊ चंदा के रहत तक बहुंतायत ले उन्नति होवय।

[8] ओह समुंदर ले समुंदर तक अऊ फरात नदी ले लेके धरती के छोर तक राज करे।

[9] मरू-भुइयां के जन-जाति के मनखेमन ओकर आघू म माड़ी टेकंय अऊ ओकर बईरीमन धुर्रा चाटंय।

[10] तरसीस अऊ दूरिहा समुंदर तीर के राजामन ओकर बर भेंट लेके आवंय। सेबा अऊ सबा के राजामन ओला उपहार देवंय।

[11] जम्मो राजामन ओला दंडवत करंय अऊ जम्मो जाति के मनखेमन ओकर सेवा करंय।

[12] काबरकि ओ जरूरतमंद, जऊन मन ओला पुकारथें, अऊ ओ पीरा म परे मनखे, जऊन मन के मदद करइया कोनो नइं एं, ओमन ला ओह छोंड़ाही।

[13] ओह दुरबल अऊ जरूरतमंद ऊपर दया करही अऊ जरूरतमंद ला मिरतू ले बचाही।

[14] ओह ओमन ला अतियाचार अऊ हिंसा ले बचाही, काबरकि ओकर नजर म ओमन के खून ह कीमती अय।

[15] ओकर लम्बा उमर होवय! सेबा के सोन ओला दिये जावय। मनखेमन ओकर बर हमेसा पराथना करंय अऊ दिन भर ओला आसीस देवत रहंय।

[16] पूरा देस म बहुंतायत से अनाज उपजे; पहाड़ीमन के चोटी म येह लहलहावय। लबानोन के सहीं फसल म उन्नति होवय अऊ भुइयां के कांदी सहीं बढ़य।

[17] ओकर नांव ह सदाकाल तक बने रहय; जब तक सूरज हवय, तब तक येह बने रहय। तब जम्मो जाति के मनखेमन ओकर जरिये आसीस पाहीं, अऊ ओमन ओला धइन कहिहीं।

[18] यहोवा परमेसर, इसरायल के परमेसर के परसंसा होवय, सिरिप ओहीच ह अद्भूत काम करथे।

[19] ओकर महिमामय नांव के सदाकाल तक परसंसा होवय; जम्मो धरती ह ओकर महिमा ले भर जावय। आमीन अऊ आमीन।

[20] यिसै के बेटा दाऊद के पराथना इहां खतम होथे।

भजन-संहिता — Chapters