[1] यहोवा ला धनबाद देवव, काबरकि ओह बने अय; ओकर मया हमेसा बने रहिथे।
[2] यहोवा के दुवारा छोंड़ाय गय मनखेमन ये बात कहंय— जेमन ला ओह बईरीमन के हांथ ले छोंड़ाय हवय,
[3] जेमन ला ओह देस-देस ले, पूरब अऊ पछिम ले, उत्तर अऊ दक्खिन ले इकट्ठा करे हवय।
[4] कुछू झन निरजन प्रदेस के बेकार जगह म भटकिन, ओमन ला कोनो सहर जाय के रसता नइं मिलिस, जिहां ओमन बस जावंय।
[5] ओमन भूखन अऊ पीयासन रिहिन, अऊ ओमन के जिनगी कम होवत गीस।
[6] तब ओमन अपन संकट के बेरा म यहोवा ला पुकारिन, अऊ ओह ओमन ला ओमन के संकट ले बचाईस।
[7] ओह ओमन ला एक सीधा रसता ले एक सहर म ले गीस जिहां ओमन रह सकंय।
[8] ओमन यहोवा के अटूट मया अऊ मानव-जाति बर करे गे अद्भूत काम बर ओला धनबाद देवंय,
[9] काबरकि ओह पीयासन के पीयास बुझाथे अऊ भूखन ला बने चीजमन ले संतोस करथे।
[10] कुछू मन अंधियार, घोर अंधियार म बईठिन, कैदीमन लोहा के संकली म बंधे दुख झेलत रिहिन,
[11] काबरकि ओमन परमेसर के हुकूम के बिरूध चलिन अऊ सर्वोच्च परमेसर के योजनामन ला तुछ समझिन।
[12] एकरसेति ओह ओमन ला बहुंत मेहनत के काम म लगाईस; ओमन लड़खड़ाईन, अऊ ओमन के मदद करे बर कोनो नइं रिहिस।
[13] तब ओमन अपन संकट के बेरा यहोवा ला पुकारिन, अऊ ओह ओमन ला ओमन के संकट ले बचाईस।
[14] ओह ओमन ला अंधियार, घिटके अंधियार ले बाहिर निकालिस, अऊ ओमन के बेड़ीमन ला टोर डारिस।
[15] ओमन यहोवा ला ओकर अटूट मया बर धनबाद देवंय अऊ मानव-जाति बर करे गे ओकर अद्भूत काम बर धनबाद देवंय,
[16] काबरकि ओह कांसा के दुवारमन ला टोर देथे अऊ लोहा के छड़मन ला काट डारथे।
[17] कुछू जन अपन बिदरोही काम के कारन मुरूख बन गीन अऊ अपन अपराध के कारन दुख म पड़िन।
[18] ओमन ला जम्मो किसम के जेवन ले अरूचि हो गीस अऊ ओमन मिरतू के दुवार म हबर गीन।
[19] तब ओमन अपन संकट म यहोवा ला पुकारिन, अऊ ओह ओमन ला ओमन के संकट ले बचाईस।
[20] ओह अपन बचन के दुवारा ओमन ला चंगा करिस; ओह ओमन ला मरे ले बचाईस।
[21] ओमन यहोवा के अटूट मया अऊ मानव-जाति बर करे ओकर अद्भूत काम बर ओला धनबाद देवंय।
[22] ओमन धनबाद के बलिदान चघावंय अऊ आनंद के गीत गाय के दुवारा ओकर काममन ला बतावंय।
[23] कुछू मनखेमन पानी जहाज म समुंदर म गीन; ओमन समुंदर म होके बेपार करत रिहिन।
[24] ओमन यहोवा के काममन ला, गहिरा समुंदर म करे गय ओकर अद्भूत काममन ला देखिन।
[25] काबरकि ओकर कहे ले आंधी चलिस जेकर ले समुंदर म ऊंचहा-ऊंचहा लहरा उठिस।
[26] ओमन अकास तक ऊपर उठिन अऊ खाल्हे गहरई तक गीन; अपन जोखिम म ओमन के हिम्मत खतम होवत रिहिस।
[27] ओमन मतवारमन सहीं चक्कर खावत रिहिन अऊ लड़खड़ावत रिहिन; ओमन के बुद्धि काम नइं करत रिहिस।
[28] तब ओमन अपन संकट म यहोवा ला पुकारिन, अऊ ओह ओमन ला ओमन के संकट ले बाहिर निकालिस।
[29] ओह आंधी ला सांत कर दीस; समुंदर के लहरामन थम गीन।
[30] लहरामन के सांत होय ले ओमन खुस होईन, अऊ ओह ओमन ला ओमन के मनचाहा बंदरगाह म ले गीस।
[31] ओमन यहोवा ला ओकर अटूट मया अऊ मानव-जाति बर करे ओकर अद्भूत काम बर धनबाद देवंय।
[32] ओमन मनखेमन के सभा म ओकर नांव ला ऊंचहा करंय अऊ अगुवामन के सभा म ओकर परसंसा करंय।
[33] उहां रहइया मनखेमन के दुस्टता के कारन ओह नदीमन ला निरजन भुइयां,
[34] पानी के सोतामन ला सूखा भुइयां, अऊ फलदार भुइयां ला नूनवाले बंजर भुइयां म बदल दीस।
[35] ओह निरजन भुइयां ला पानी के तरिया अऊ सूखा भुइयां ला पानी के बहत सोतामन म बदल दीस;
[36] उहां ओह भूखा मनखेमन ला रहे बर लानिस, अऊ ओमन एक सहर बनाईन जिहां ओमन रह सकंय।
[37] ओमन खेतमन ला बोईन अऊ अंगूर के बारी लगाईन जेमा ले बने फसल मिलिस;
[38] ओह ओमन ला आसीस दीस अऊ ओमन के संखिया बहुंत हो गीस, अऊ ओह ओमन के पसुमन के संखिया ला घलो घटे नइं दीस।
[39] तब ओमन के संखिया घटे लगिस, अऊ सतावा, बिपत्ति अऊ दुख के दुवारा ओमन नम्र करे गीन;
[40] जऊन ह परभावसाली मनखेमन के अपमान करथे, ओह ओमन ला बिगर रसतावाले जंगली भुइयां म भटकाथे।
[41] पर ओह जरूरतमंद मनखेमन ला ओमन के दुख ले निकालथे अऊ ओमन के परिवार ला पसुमन के झुंड सहीं बढ़ाथे।
[42] सीधवा मनखेमन देखके आनंद मनाथें, पर जम्मो दुस्ट मनखेमन अपन मुहूं बंद रखथें।
[43] जऊन ह बुद्धिमान ए, ओह ये बातमन ऊपर धियान देवय अऊ यहोवा के मया के काममन ऊपर बिचार करय।