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[1] हे परमेसर, मोर पुकार ला सुन; मोर पराथना ला सुन।

[2] धरती के छोर ले मेंह तोला पुकारत हंव, तोला पुकारत-पुकारत मोर मन ह दुरबल होवथे; मोला ओ चट्टान ऊपर ले जा, जऊन ह मोर ले ऊंच हे।

[3] काबरकि तेंह मोर सरन-स्थान ठहिरे हस, अऊ बईरीमन के बिरूध एक मजबूत दीवार अस।

[4] मेंह लालसा करथंव कि तोर डेरा म हमेसा बर रहंव अऊ तोर डेनामन के छइहां म सरन लेवंव।

[5] हे परमेसर, तेंह मोर मन्नतमन ला सुने हस; तेंह मोला ओमन के कुल-परंपरा ला दे हस; जऊन मन तोर नांव के भय मानथें।

[6] राजा के उमर ला बढ़ा, पीढ़ी-पीढ़ी तक ओकर उमर ला बढ़ा दे।

[7] परमेसर के उपस्थिति म ओह हमेसा सिंघासन म बईठय; ओकर रकछा म अपन मया अऊ बिसवासयोग्यता ला बनाय रख।

[8] तब मेंह हमेसा तोर नांव के परसंसा करहूं अऊ दिन-प्रतिदिन अपन मन्नतमन ला पूरा करहूं।

भजन-संहिता — Chapters