[1] हे परमेसर, तेंह काबर हमन ला हमेसा बर छोंड़ दे हस? तोर गुस्सा ह तोर चरागन के भेड़मन के बिरूध काबर सुलगत हे?
[2] ओ जाति के मनखेमन ला सुरता कर, जेमन ला तेंह बहुंत पहिले बिसाय रहय, तोर निज भाग के ओ मनखेमन, जेमन ला तेंह छोंड़ाय रहय— सियोन पहाड़, जिहां तेंह निवास करय, ओ जम्मो ला सुरता कर।
[3] अपन कदम ला ये अनंतकाल के बिनास के तरफ कर, ये जम्मो बिनास, जेला बईरी ह पबितर-स्थान ऊपर लाने हवय।
[4] तोर बिरोधीमन ओ जगह म गरजत हें, जिहां तेंह हमर ले मुलाकात करे रहय; ओमन चिनहां के रूप म अपन झंडा गाड़े हवंय।
[5] ओमन अइसने बरताव करिन, जइसने मनखेमन घोर जंगल म कुसलता से रूखमन ला टंगिया ले काटथें।
[6] ओमन अपन टांगा अऊ टंगिया ले नक्कासी करे गे लकड़ी ला चूर-चूर कर दीन।
[7] ओमन तोर पबितर-स्थान ला जलाके धुर्रा म मिला दीन; जिहां तोर अराधना होथे, ओ जगह ला ओमन असुध कर दीन।
[8] ओमन अपन मन म कहिन, “हमन ओमन ला पूरा कुचर देबो!” ओमन ओ हर एक जगह ला जला दीन, जिहां देस म परमेसर के अराधना होवत रिहिस।
[9] हमन ला परमेसर ले कोनो चिनहां नइं दिये जावत हे; कोनो अगमजानी नइं बचे हें, अऊ हमर म ले कोनो नइं जानय कि अइसने कब तक रहिही।
[10] हे परमेसर, कब तक बईरी ह तोर ठट्ठा करत रहिही? का बईरी ह हमेसा तोर नांव के निन्दा करत रहिही?
[11] काबर तेंह अपन हांथ ला रोके रहिथस, अपन जेवनी हांथ ला? ओला अपन कपड़ा ले बाहिर निकालके बईरीमन के नास कर दे!
[12] पर परमेसर ह बहुंत पहिले से मोर राजा ए; ओह धरती ऊपर उद्धार के काम करथे।
[13] येह तें रहय, जऊन ह अपन सक्ति ले समुंदर ला दू भाग कर देय; तेंह पानी म बिकराल जन्तु के मुड़ ला फोर डारय।
[14] येह तें रहय, जऊन ह लिबयातान के मुड़ ला कुचरके ओला जंगली पसुमन ला खाय बर देय दे।
[15] येह तें रहय, जऊन ह सोता अऊ झरनामन ला खोलके पानी के धारा बहाय; तेंह नदी म हमेसा बहत पानी ला सूखा दे।
[16] दिन ह तोर ए, अऊ रथिया ह घलो तोर ए; तेंह सूरज अऊ चंदा ला स्थापित करय।
[17] येह तें रहय, जऊन ह धरती के जम्मो सीमना ला बांधय; धूपकाल अऊ जड़काला ला तेंह ठहिराय।
[18] हे यहोवा, सुरता कर कि बईरी ह कइसे तोर ठट्ठा करे हवय, मुरूख मनखेमन कइसे तोर नांव के निन्दा करे हवंय।
[19] अपन पंड़की के जिनगी ला जंगली पसुमन के हांथ म झन सऊंप दे; दुख म पड़े तोर मनखेमन के जिनगी ला हमेसा बर झन भुला दे।
[20] अपन करे गय करार के लाज ला रख, काबरकि देस के अंधियार जगहमन म बहुंत हिंसा होवत हे।
[21] अतियाचार सहनेवाला मनखे ला लज्जा म झन पड़न दे; गरीब अऊ जरूरतमंद मनखेमन तोर नांव के परसंसा करंय।
[22] हे परमेसर, उठ अऊ अपन मामला के बचाव कर; सुरता कर कि मुरूखमन दिन भर कइसे तोर ठट्ठा करथें।
[23] अपन बिरोधीमन के चिचियाई ला अनदेखा झन कर, तोर बईरीमन के कोलाहल, जऊन ह लगातार बढ़त जावत हे।