[1] हे सासन करइयामन, का तुमन सही म नियाय-संगत बात करथव? का तुमन मनखेमन के सही नियाय करथव?
[2] नइं, अपन मन म तुमन अनियाय करे के उपाय करथव, अऊ अपन हांथ ले धरती म हिंसा फईलाथव।
[3] अऊ त अऊ दुस्टमन जनम ले गलत रसता म चलथें; गरभ ले ही ओमन लबारी बात फईलात भटक जाथें।
[4] ओमन के जहर ह एक सांप के जहर सहीं अय, एक नाग सांप के सहीं अय, जऊन ह कि नइं सुनय,
[5] अऊ ओह संपेरा के धुन ऊपर धियान नइं देवय, ओ संपेरा ह चाहे कतको मोहित करइया धुन देवय।
[6] हे परमेसर, ओमन के मुहूं म ही ओमन के दांत ला टोर दे; हे यहोवा, ओ सिंहमन के दांत ला जड़ ले ही उखान दे!
[7] ओमन ओ पानी के सहीं गायब हो जावंय, जऊन ह बहत-बहत आघू निकल जाथे; जब ओमन धनुस तानंय, त ओमन के तीर ह निसाना म झन लगय।
[8] ओमन एक घोंघा के सहीं हो जावंय, जऊन ह सरकत-सरकत टघल जाथे, ओमन एक मरे जनमे लइका सहीं होवंय, जऊन ह सूरज ला कभू नइं देखय।
[9] येकर पहिले कि कंटिला-झाड़ी म लगे आगी के आंच ह तोर हांड़ी म लगय— चाहे ओमन हरियर होवंय या सूख गे होवंय—ओमन ला बवंडर म उड़ा दिये जाही।
[10] जब ओमन ले बदला लिये जाही, त धरमीमन खुस होहीं, जब ओमन अपन पांव दुस्टमन के खून म डारहीं।
[11] तब मनखेमन कहिहीं, “खचित धरमीमन ला अभी घलो ईनाम दिये जाथे; खचित एक परमेसर हवय, जऊन ह धरती के नियाय करथे।”