[1] मेंह अपन मन म कहेंव, “मेंह अपन चालचलन ऊपर धियान दूहूं अऊ मोर जीभ ला पाप के बात ले दूरिहा रखहूं; जब दुस्ट मनखेमन मोर आघू म होहीं, त मेंह अपन मुहूं म लगाम लगाय रखहूं।”
[2] एकरसेति मेंह एकदम चुप रहेंव, इहां तक कि मेंह कोनो बने बात घलो नइं कहेंव। पर मोर पीरा ह बढ़ गीस;
[3] मोर हिरदय ह भीतरे-भीतर बरत रिहिस। जब मेंह सोचत रहेंव, आगी ह भड़क उठिस; तब मेंह अपन जीभ ले बोले लगेंव:
[4] “हे यहोवा, मोला मोर जिनगी के अन्त ला देखा अऊ मोर जिनगी के कतेक दिन बांचे हवय, मोला बता; मोला बता कि मोर जिनगी कइसे तेजी से खतम होवथे।
[5] तेंह मोर जिनगी के दिन ला सिरिप बीता भर कर दे हस; मोर जिनगी के थोरकन बछरमन तोर आघू म कुछू नो हंय। हर एक जन एक सांस के सहीं अय, अऊ त अऊ ओमन घलो, जऊन मन सुरकछित जान पड़थें।
[6] “खचित हर एक जन छइहां के सहीं एती-ओती फिरत रहिथें; बेकार म ओमन भाग-दऊड़ करके धन जमा करत रहिथें, ये जाने बिगर कि मरे के बाद ये धन ह काकर होही।
[7] “पर अब, हे परभू, मेंह का चीज के डहार देखत हंव? मोर आसा ह तोरेच ऊपर हवय।
[8] मोला मोर जम्मो अपराध ले बचा ले; मोला मुरूखमन के तिरस्कार के पात्र झन बना।
[9] मेंह चुप रहेंव; अऊ अपन मुहूं नइं खोलेंव, काबरकि तें अस ओ जन, जऊन ह येला करे हवय।
[10] तेंह मोर ऊपर जऊन बिपत्ति डाले हस, ओला हटा ले; तोर हांथ के मार ले मेंह कुछू करे के लईक नइं अंव।
[11] जब तेंह कोनो मनखे ला ओकर पाप के कारन डांटथस अऊ दंड देथस, त तेंह ओमन के धन-संपत्ति ला घूना खाय सहीं खतम कर देथस— खचित हर एक जन जिनगी के एक सांस के सहीं अय।
[12] “हे यहोवा, मोर पराथना ला सुन, मदद बर मोर गोहार ला सुन; मोर रोवई ला सुनके चुप झन रह। मेंह एक परदेसी, एक अजनबी के सहीं तोर संग रहिथंव, जइसे कि मोर जम्मो पुरखामन रिहिन।
[13] एकर पहिले कि मेंह ये संसार ले चले जावंव अऊ खतम हो जावंव, तेंह अपन कोप ला मोर ऊपर ले हटा ले, ताकि मेंह जिनगी के फेर आनंद उठा सकंव।”