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[1] मेंह यहोवा के बड़े मया के हमेसा गीत गाहूं; मेंह पीढ़ी-पीढ़ी तक तोर बिसवासयोग्यता के बखान अपन मुहूं ले करहूं।

[2] मेंह घोसना करहूं कि तोर मया ह हमेसा अटल बने रहिथे, तेंह स्वरग म अपन बिसवासयोग्यता ला इस्थिर करे हस।

[3] तेंह कहय, “मेंह अपन चुने जन के संग एक करार करे हंव, मेंह अपन सेवक दाऊद ले कसम खाय हंव,

[4] ‘मेंह तोर बंस ला हमेसा बर स्थापित करहूं अऊ पीढ़ी-पीढ़ी तक तोर सिंघासन ला अटल बनाय रखहूं।’ ”

[5] हे यहोवा, स्वरग म तोर अद्भूत काम के, अऊ पबितर मनखेमन के सभा म तोर बिसवासयोग्यता के परसंसा होथे।

[6] काबरकि ऊपर अकास-मंडल म कोन हवय, जेकर तुलना यहोवा ले करे जा सकथे? स्वरगीय जीवमन के बीच म यहोवा के सहीं कोन हवय?

[7] पबितर मनखेमन के परिसद म परमेसर के बहुंत भय माने जाथे; ओह अपन चारों कोति रहइया जम्मो झन ले जादा अद्भूत ए।

[8] हे यहोवा, सर्वसक्तिमान परमेसर, तोर सहीं कोन हवय? हे यहोवा, तेंह सक्तिसाली अस, अऊ तोर बिसवासयोग्यता तोर चारों कोति रहिथे।

[9] उमड़त समुंदर ऊपर तेंह सासन करथस; जब येकर लहरामन उठथें, त तेंह ओमन ला सांत करथस।

[10] तेंह राहाब ला मारे गय मनखे सहीं कुचर डारय; अपन सक्तिसाली हांथ ले तेंह बईरीमन ला तितिर-बितिर कर दे हस।

[11] स्वरगमन तोर अंय, अऊ धरती घलो तोर अय; संसार अऊ येमा के जम्मो चीज के नीव तेंह रखे हस।

[12] उत्तर अऊ दक्खिन ला तेंह बनाय हस; ताबोर अऊ हेरमोन पहाड़ तोर नांव के आनंद के गीत गाथें।

[13] तोर बाहां म सक्ति हवय; तोर हांथ ह मजबूत हवय, तोर जेवनी हांथ परबल हे।

[14] धरमीपन अऊ नियाय तोर सिंघासन के नीव अंय; मया अऊ बिसवासयोग्यता तोर आघू-आघू चलथें।

[15] हे यहोवा, धइन अंय ओमन, जऊन मन तोर जय-जयकार करई सीख गे हवंय, जऊन मन तोर उपस्थिति के अंजोर म चलथें।

[16] ओमन दिन भर तोर नांव म आनंद मनाथें; ओमन तोर धरमीपन के आनंद मनाथें।

[17] काबरकि तेंह ओमन के महिमा अऊ बल अस, अऊ अपन खुसी ले हमर सींग ला ऊपर उठाथस।

[18] वास्तव म, हमर ढाल ह यहोवा के अय, हमर राजा ह इसरायल के पबितर परमेसर के अय।

[19] एक बार तें एक दरसन म गोठियाय, अपन बिसवासयोग्य मनखेमन ला तेंह कहय: “मेंह एक योद्धा ला बल दे हवंव; मेंह मनखेमन के बीच ले एक जवान ला खड़े करे हवंव।

[20] मोला मोर सेवक दाऊद मिल गे हवय; अपन पबितर तेल ले मेंह ओकर अभिसेक करे हवंव।

[21] मोर हांथ ह ओला बनाय रखही; खचित मोर बाहां ह ओला बलवान बनाही।

[22] बईरी ह ओला तंग नइं कर सकही; दुस्ट ह ओला दुख नइं देय सकही।

[23] मेंह ओकर बिरोधीमन ला ओकर आघू म कुचर दूहूं अऊ ओकर बईरीमन ला मार डारहूं।

[24] मोर न टूटनेवाला मया ओकर संग रहिही, अऊ मोर नांव के जरिये ओकर सींग ह ऊपर होही।

[25] मेंह समुंदर के ऊपर ओकर हांथ, अऊ नदीमन के ऊपर ओकर जेवनी हांथ ला रखहूं।

[26] ओह मोला पुकारके कहिही, ‘तेंह मोर ददा, मोर परमेसर, मोर उद्धारकर्ता चट्टान अस।’

[27] मेंह ओला मोर पहिलांत होय बर ठहिराहूं, ओह धरती के राजामन म सबले ऊपर होही।

[28] मेंह अपन मया ओकर ऊपर हमेसा बनाय रखहूं, अऊ ओकर संग मोर करार ह कभू नइं टूटही।

[29] मेंह ओकर बंस ला हमेसा बर स्थापित करहूं, अऊ जब तक स्वरग हवय, तब तक ओकर सिंघासन बने रहिही।

[30] “कहूं ओकर बेटामन मोर कानून ला तियाग देथें अऊ मोर बिधि-बिधान म नइं चलंय,

[31] कहूं ओमन मोर नियम ला टोरथें, अऊ मोर हुकूममन ला नइं मानंय,

[32] त मेंह ओमन के पाप के दंड सोंटी ले, अऊ ओमन के दुस्टता के दंड कोर्रा ले दूहूं;

[33] पर मेंह अपन मया ला ओकर ऊपर ले नइं हटाहूं, अऊ न ही कभू मेंह अपन बिसवासयोग्यता ला छोंड़हूं।

[34] मेंह अपन करार ला नइं टोरहूं या अपन कहे बात ला नइं बदलहूं।

[35] जम्मो के सेति एक बार, मेंह अपन पबितरता के सपथ खाय हंव— अऊ मेंह दाऊद ले लबारी नइं मारंव—

[36] कि ओकर बंस हमेसा चलते रहिही अऊ ओकर सिंघासन ह सूरज के सहीं मोर आघू म बने रहिही;

[37] येला अकास म बिसवासयोग्य गवाह के रूप म चंदा के सहीं हमेसा बर स्थापित करे जाही।”

[38] पर तेंह छोंड़ दे हस, तेंह तिरस्कार करे हस, अपन अभिसिक्त जन ऊपर तेंह बहुंत गुस्सा करे हस।

[39] तेंह अपन सेवक के संग करे करार ला तियाग दे हस अऊ ओकर मुकुट ला धुर्रा म असुध कर दे हस।

[40] तेंह ओकर जम्मो दीवार ला गिरा दे हस अऊ ओकर गढ़मन ला खंडहर बना दे हस।

[41] ओ जम्मो, जऊन मन उहां ले होके जाथें, ओमन ओला लूट ले हवंय; ओह अपन परोसीमन बर अपमान के चीज बन गे हवय।

[42] तेंह ओकर बईरीमन के जेवनी हांथ ला उठाय हस; तेंह ओकर जम्मो बईरीमन ला आनंदित करे हस।

[43] वास्तव म, तेंह ओकर तलवार के धार ला मोड़ दे हस अऊ ओकर लड़ई म ओकर मदद नइं करे हस।

[44] तेंह ओकर सोभा के अन्त कर दे हस अऊ ओकर सिंघासन ला भुइयां म गिरा दे हस।

[45] तेंह ओकर जवानी के दिन ला कम कर दे हस; तेंह ओला लज्जा के ओढ़नी ले ढांप दे हस।

[46] हे यहोवा, कब तक? का तेंह हमेसा बर अपनआप ला छिपा लेबे? तोर कोप ह कब तक आगी सहीं बरत रहिही?

[47] सुरता कर, मोर जिनगी ह कतेक चंचल ए। का बेकार म तेंह जम्मो मानव-जाति ला सिरजे हस!

[48] अइसने कोन हे, जऊन ह जीयथे अऊ मिरतू ला नइं देखही, या कोन ह कबर के सक्ति ले बच सकथे?

[49] हे परभू, तोर पहिले के ओ बड़े मया कहां हवय, जेकर संग अपन बिसवासयोग्यता म, तेंह दाऊद ले सपथ खाय रहय?

[50] हे परभू, सुरता कर, तोर सेवक के कइसे हंसी उड़ाय गे हवय, मेंह कइसे जम्मो आनजातमन के ताना ला अपन मन म सहत हंव,

[51] हे यहोवा, ओ ताना जेकर दुवारा तोर बईरीमन हंसी उड़ाय हवंय, जेकर दुवारा ओमन तोर अभिसिक्त जन के हर कदम म हंसी उड़ाय हवंय।

[52] यहोवा के परसंसा सदा-सर्वदा होवत रहय! आमीन अऊ आमीन।

भजन-संहिता — Chapters