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[1] रब बादशाह है, वह जलाल से मुलब्बस है। रब जलाल से मुलब्बस और क़ुदरत से कमरबस्ता है। यक़ीनन दुनिया मज़बूत बुन्याद पर क़ाइम है, और वह नहीं डगमगाएगी।

[2] तेरा तख़्त क़दीम ज़माने से क़ाइम है, तू अज़ल से मौजूद है।

[3] ऐ रब, सैलाब गरज उठे, सैलाब शोर मचा कर गरज उठे, सैलाब ठाठें मार कर गरज उठे।

[4] लेकिन एक है जो गहरे पानी के शोर से ज़्यादा ज़ोर-आवर, जो समुन्दर की ठाठों से ज़्यादा ताक़तवर है। रब जो बुलन्दियों पर रहता है कहीं ज़्यादा अज़ीम है।

[5] ऐ रब, तेरे अह्काम हर तरह से क़ाबिल-ए-एतिमाद हैं। तेरा घर हमेशा तक क़ुद्दूसियत से आरास्ता रहेगा।

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