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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। ऐ रब, बादशाह तेरी क़ुव्वत देख कर शादमान है, वह तेरी नजात की कितनी बड़ी ख़ुशी मनाता है।

[2] तू ने उस की दिली ख़्वाहिश पूरी की और इन्कार न किया जब उस की आर्ज़ू ने होंटों पर अल्फ़ाज़ का रूप धारा। (सिलाह)

[3] क्यूँकि तू अच्छी अच्छी बरकतें अपने साथ ले कर उस से मिलने आया, तू ने उसे ख़ालिस सोने का ताज पहनाया।

[4] उस ने तुझ से ज़िन्दगी पाने की आर्ज़ू की तो तू ने उसे उम्र की दराज़ी बख़्शी, मज़ीद इतने दिन कि उन की इन्तिहा नहीं।

[5] तेरी नजात से उसे बड़ी इज़्ज़त हासिल हुई, तू ने उसे शान-ओ-शौकत से आरास्ता किया।

[6] क्यूँकि तू उसे अबद तक बरकत देता, उसे अपने चेहरे के हुज़ूर ला कर निहायत ख़ुश कर देता है।

[7] क्यूँकि बादशाह रब पर एतिमाद करता है, अल्लाह तआला की शफ़्क़त उसे डगमगाने से बचाएगी।

[8] तेरे दुश्मन तेरे क़ब्ज़े में आ जाएंगे, जो तुझ से नफ़रत करते हैं उन्हें तेरा दहना हाथ पकड़ लेगा।

[9] जब तू उन पर ज़ाहिर होगा तो वह भड़कती भट्टी की सी मुसीबत में फंस जाएंगे। रब अपने ग़ज़ब में उन्हें हड़प कर लेगा, और आग उन्हें खा जाएगी।

[10] तू उन की औलाद को रू-ए-ज़मीन पर से मिटा डालेगा, इन्सानों में उन का नाम-ओ-निशान तक नहीं रहेगा।

[11] गो वह तेरे ख़िलाफ़ साज़िशें करते हैं तो भी उन के बुरे मन्सूबे नाकाम रहेंगे।

[12] क्यूँकि तू उन्हें भगा कर उन के चेहरों को अपने तीरों का निशाना बना देगा।

[13] ऐ रब, उठ और अपनी क़ुदरत का इज़हार कर ताकि हम तेरी क़ुदरत की तम्जीद में साज़ बजा कर गीत गाएँ।

ज़बूर — Chapters