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[1] ज़ियारत का गीत। ऐ रब, मैं तुझे गहराइयों से पुकारता हूँ।

[2] ऐ रब, मेरी आवाज़ सुन! कान लगा कर मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे!

[3] ऐ रब, अगर तू हमारे गुनाहों का हिसाब करे तो कौन क़ाइम रहेगा? कोई भी नहीं!

[4] लेकिन तुझ से मुआफ़ी हासिल होती है ताकि तेरा ख़ौफ़ माना जाए।

[5] मैं रब के इन्तिज़ार में हूँ, मेरी जान शिद्दत से इन्तिज़ार करती है। मैं उस के कलाम से उम्मीद रखता हूँ।

[6] पहरेदार जिस शिद्दत से पौ फटने के इन्तिज़ार में रहते हैं, मेरी जान उस से भी ज़्यादा शिद्दत के साथ, हाँ ज़्यादा शिद्दत के साथ रब की मुन्तज़िर रहती है।

[7] ऐ इस्राईल, रब की राह देखता रह! क्यूँकि रब के पास शफ़्क़त और फ़िद्या का ठोस बन्द-ओ-बस्त है।

[8] वह इस्राईल के तमाम गुनाहों का फ़िद्या दे कर उसे नजात देगा।

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