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[1] दाऊद का ज़ियारत का गीत। मैं उन से ख़ुश हुआ जिन्हों ने मुझ से कहा, “आओ, हम रब के घर चलें।”

[2] ऐ यरूशलम, अब हमारे पाँओ तेरे दरवाज़ों में खड़े हैं।

[3] यरूशलम शहर यूँ बनाया गया है कि उस के तमाम हिस्से मज़बूती से एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं।

[4] वहाँ क़बीले, हाँ रब के क़बीले हाज़िर होते हैं ताकि रब के नाम की सताइश करें जिस तरह इस्राईल को फ़रमाया गया है।

[5] क्यूँकि वहाँ तख़्त-ए-अदालत करने के लिए लगाए गए हैं, वहाँ दाऊद के घराने के तख़्त हैं।

[6] यरूशलम के लिए सलामती माँगो! “जो तुझ से प्यार करते हैं वह सुकून पाएँ।

[7] तेरी फ़सील में सलामती और तेरे महलों में सुकून हो।”

[8] अपने भाइयों और हमसायों की ख़ातिर मैं कहूँगा, “तेरे अन्दर सलामती हो!”

[9] रब हमारे ख़ुदा के घर की ख़ातिर मैं तेरी ख़ुशहाली का तालिब रहूँगा।

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