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[1] मुबारक है वह जो न बेदीनों के मश्वरे पर चलता, न गुनाहगारों की राह पर क़दम रखता, और न तानाज़नों के साथ बैठता है
[2] बल्कि रब की शरीअत से लुत्फ़अन्दोज़ होता और दिन रात उसी पर ग़ौर-ओ-ख़ौज़ करता रहता है।
[3] वह नहरों के किनारे पर लगे दरख़्त की मानिन्द है। वक़्त पर वह फल लाता, और उस के पत्ते नहीं मुरझाते। जो कुछ भी करे उस में वह कामयाब है।
[4] बेदीनों का यह हाल नहीं होता। वह भूसे की मानिन्द हैं जिसे हवा उड़ा ले जाती है।
[5] इस लिए बेदीन अदालत में क़ाइम नहीं रहेंगे, और गुनाहगार का रास्तबाज़ों की मजलिस में मक़ाम नहीं होगा।
[6] क्यूँकि रब रास्तबाज़ों की राह की पहरादारी करता है जबकि बेदीनों की राह तबाह हो जाएगी।
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