Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 0:50

[1] ज़बूर। तारदार साज़ों के साथ गाना है। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। अल्लाह हम पर मेहरबानी करे और हमें बरकत दे। वह अपने चेहरे का नूर हम पर चमकाए (सिलाह)

[2] ताकि ज़मीन पर तेरी राह और तमाम क़ौमों में तेरी नजात मालूम हो जाए।

[3] ऐ अल्लाह, क़ौमें तेरी सताइश करें, तमाम क़ौमें तेरी सताइश करें।

[4] उम्मतें शादमान हो कर ख़ुशी के नारे लगाएँ, क्यूँकि तू इन्साफ़ से क़ौमों की अदालत करेगा और ज़मीन पर उम्मतों की क़ियादत करेगा। (सिलाह)

[5] ऐ अल्लाह, क़ौमें तेरी सताइश करें, तमाम क़ौमें तेरी सताइश करें।

[6] ज़मीन अपनी फ़सलें देती है। अल्लाह हमारा ख़ुदा हमें बरकत दे!

[7] अल्लाह हमें बरकत दे, और दुनिया की इन्तिहाएँ सब उस का ख़ौफ़ मानें।

ज़बूर — Chapters