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[1] दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, मैं पूरे दिल से तेरी सताइश करूँगा, माबूदों के सामने ही तेरी तम्जीद करूँगा।

[2] मैं तेरी मुक़द्दस सुकूनतगाह की तरफ़ रुख़ करके सिज्दा करूँगा, तेरी मेहरबानी और वफ़ादारी के बाइस तेरा शुक्र करूँगा। क्यूँकि तू ने अपने नाम और कलाम को तमाम चीज़ों पर सरफ़राज़ किया है।

[3] जिस दिन मैं ने तुझे पुकारा तू ने मेरी सुन कर मेरी जान को बड़ी तक़वियत दी।

[4] ऐ रब, दुनिया के तमाम हुक्मरान तेरे मुँह के फ़रमान सुन कर तेरा शुक्र करें।

[5] वह रब की राहों की मद्हसराई करें, क्यूँकि रब का जलाल अज़ीम है।

[6] क्यूँकि गो रब बुलन्दियों पर है वह पस्तहाल का ख़याल करता और मग़रूरों को दूर से ही पहचान लेता है।

[7] जब कभी मुसीबत मेरा दामन नहीं छोड़ती तो तू मेरी जान को ताज़ादम करता है, तू अपना दहना हाथ बढ़ा कर मुझे मेरे दुश्मनों के तैश से बचाता है।

[8] रब मेरी ख़ातिर बदला लेगा। ऐ रब, तेरी शफ़्क़त अबदी है। उन्हें न छोड़ जिन को तेरे हाथों ने बनाया है!

ज़बूर — Chapters