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[1] सुलैमान का ज़ियारत का गीत। अगर रब घर को तामीर न करे तो उस पर काम करने वालों की मेहनत अबस है। अगर रब शहर की पहरादारी न करे तो इन्सानी पहरेदारों की निगहबानी अबस है।

[2] यह भी अबस है कि तुम सुब्ह-सवेरे उठो और पूरे दिन मेहनत-मशक़्क़त के साथ रोज़ी कमा कर रात गए सो जाओ। क्यूँकि जो अल्लाह को प्यारे हैं उन्हें वह उन की ज़रूरियात उन के सोते में पूरी कर देता है।

[3] बच्चे ऐसी नेमत हैं जो हम मीरास में रब से पाते हैं, औलाद एक अज्र है जो वही हमें देता है।

[4] जवानी में पैदा हुए बेटे सूरमे के हाथ में तीरों की मानिन्द हैं।

[5] मुबारक है वह आदमी जिस का तर्कश उन से भरा है। जब वह शहर के दरवाज़े पर अपने दुश्मनों से झगड़ेगा तो शर्मिन्दा नहीं होगा।

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