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[1] मैं रब से मुहब्बत रखता हूँ, क्यूँकि उस ने मेरी आवाज़ और मेरी इल्तिजा सुनी है।

[2] उस ने अपना कान मेरी तरफ़ झुकाया है, इस लिए मैं उम्र भर उसे पुकारूँगा।

[3] मौत ने मुझे अपनी ज़न्जीरों में जकड़ लिया, और पाताल की परेशानियाँ मुझ पर ग़ालिब आईं। मैं मुसीबत और दुख में फंस गया।

[4] तब मैं ने रब का नाम पुकारा, “ऐ रब, मेहरबानी करके मुझे बचा!”

[5] रब मेहरबान और रास्त है, हमारा ख़ुदा रहीम है।

[6] रब सादा लोगों की हिफ़ाज़त करता है। जब मैं पस्तहाल था तो उस ने मुझे बचाया।

[7] ऐ मेरी जान, अपनी आरामगाह के पास वापस आ, क्यूँकि रब ने तेरे साथ भलाई की है।

[8] क्यूँकि ऐ रब, तू ने मेरी जान को मौत से, मेरी आँखों को आँसू बहाने से और मेरे पाँओ को फिसलने से बचाया है।

[9] अब मैं ज़िन्दों की ज़मीन में रह कर रब के हुज़ूर चलूँगा।

[10] मैं ईमान लाया और इस लिए बोला, “मैं शदीद मुसीबत में फंस गया हूँ।”

[11] मैं सख़्त घबरा गया और बोला, “तमाम इन्सान दरोग़गो हैं।”

[12] जो भलाइयाँ रब ने मेरे साथ की हैं उन सब के इवज़ मैं क्या दूँ?

[13] मैं नजात का प्याला उठा कर रब का नाम पुकारूँगा।

[14] मैं रब के हुज़ूर उस की सारी क़ौम के सामने ही अपनी मन्नतें पूरी करूँगा।

[15] रब की निगाह में उस के ईमानदारों की मौत गिराँक़दर है।

[16] ऐ रब, यक़ीनन मैं तेरा ख़ादिम, हाँ तेरा ख़ादिम और तेरी ख़ादिमा का बेटा हूँ। तू ने मेरी ज़न्जीरों को तोड़ डाला है।

[17] मैं तुझे शुक्रगुज़ारी की क़ुर्बानी पेश करके तेरा नाम पुकारूँगा।

[18] मैं रब के हुज़ूर उस की सारी क़ौम के सामने ही अपनी मन्नतें पूरी करूँगा।

[19] मैं रब के घर की बारगाहों में, ऐ यरूशलम तेरे बीच में ही उन्हें पूरा करूँगा। रब की हम्द हो।

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