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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। मैं ने रब में पनाह ली है। तो फिर तुम किस तरह मुझ से कहते हो, “चल, परिन्दे की तरह फड़फड़ा कर पहाड़ों में भाग जा”?

[2] क्यूँकि देखो, बेदीन कमान तान कर तीर को ताँत पर लगा चुके हैं। अब वह अंधेरे में बैठ कर इस इन्तिज़ार में हैं कि दिल से सीधी राह पर चलने वालों पर चलाएँ।

[3] रास्तबाज़ क्या करे? उन्हों ने तो बुन्याद को ही तबाह कर दिया है।

[4] लेकिन रब अपनी मुक़द्दस सुकूनतगाह में है, रब का तख़्त आसमान पर है। वहाँ से वह देखता है, वहाँ से उस की आँखें आदमज़ादों को परखती हैं।

[5] रब रास्तबाज़ को परखता तो है, लेकिन बेदीन और ज़ालिम से नफ़रत ही करता है।

[6] बेदीनों पर वह जलते हुए कोएले और शोलाज़न गंधक बरसा देगा। झुलसने वाली आँधी उन का हिस्सा होगी।

[7] क्यूँकि रब रास्त है, और उसे इन्साफ़ प्यारा है। सिर्फ़ सीधी राह पर चलने वाले उस का चेहरा देखेंगे।

ज़बूर — Chapters