[1] दाऊद का एक सुनहरा ज़बूर। ऐ अल्लाह, मुझे मह्फ़ूज़ रख, क्यूँकि तुझ में मैं पनाह लेता हूँ।
[2] मैं ने रब से कहा, “तू मेरा आक़ा है, तू ही मेरी ख़ुशहाली का वाहिद सरचश्मा है।”
[3] मुल्क में जो मुक़द्दसीन हैं वही मेरे सूरमे हैं, उन ही को मैं पसन्द करता हूँ।
[4] लेकिन जो दीगर माबूदों के पीछे भागे रहते हैं उन की तक्लीफ़ बढ़ती जाएगी। न मैं उन की ख़ून की क़ुर्बानियों को पेश करूँगा, न उन के नामों का ज़िक्र तक करूँगा।
[5] ऐ रब, तू मेरी मीरास और मेरा हिस्सा है। मेरा नसीब तेरे हाथ में है।
[6] जब क़ुरआ डाला गया तो मुझे ख़ुशगवार ज़मीन मिल गई। यक़ीनन मेरी मीरास मुझे बहुत पसन्द है।
[7] मैं रब की सताइश करूँगा जिस ने मुझे मश्वरा दिया है। रात को भी मेरा दिल मेरी हिदायत करता है।
[8] रब हर वक़्त मेरी आँखों के सामने रहता है। वह मेरे दहने हाथ रहता है, इस लिए मैं नहीं डगमगाऊँगा।
[9] इस लिए मेरा दिल शादमान है, मेरी जान ख़ुशी के नारे लगाती है। हाँ, मेरा बदन पुरसुकून ज़िन्दगी गुज़ारेगा।
[10] क्यूँकि तू मेरी जान को पाताल में नहीं छोड़ेगा, और न अपने मुक़द्दस को गलने सड़ने की नौबत तक पहुँचने देगा।
[11] तू मुझे ज़िन्दगी की राह से आगाह करता है। तेरे हुज़ूर से भरपूर ख़ुशियाँ, तेरे दहने हाथ से अबदी मसर्रतें हासिल होती हैं।