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[1] मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। ज़बूर। गीत। ऐ सारी ज़मीन, ख़ुशी के नारे लगा कर अल्लाह की मद्हसराई कर!

[2] उस के नाम के जलाल की तम्जीद करो, उस की सताइश उरूज तक ले जाओ!

[3] अल्लाह से कहो, “तेरे काम कितने पुरजलाल हैं। तेरी बड़ी क़ुदरत के सामने तेरे दुश्मन दबक कर तेरी ख़ुशामद करने लगते हैं।

[4] तमाम दुनिया तुझे सिज्दा करे! वह तेरी तारीफ़ में गीत गाए, तेरे नाम की सताइश करे।” (सिलाह)

[5] आओ, अल्लाह के काम देखो! आदमज़ाद की ख़ातिर उस ने कितने पुरजलाल मोजिज़े किए हैं!

[6] उस ने समुन्दर को ख़ुश्क ज़मीन में बदल दिया। जहाँ पहले पानी का तेज़ बहाओ था वहाँ से लोग पैदल ही गुज़रे। चुनाँचे आओ, हम उस की ख़ुशी मनाएँ।

[7] अपनी क़ुदरत से वह अबद तक हुकूमत करता है। उस की आँखें क़ौमों पर लगी रहती हैं ताकि सरकश उस के ख़िलाफ़ न उठें। (सिलाह)

[8] ऐ उम्मतो, हमारे ख़ुदा की हम्द करो। उस की सताइश दूर तक सुनाई दे।

[9] क्यूँकि वह हमारी ज़िन्दगी क़ाइम रखता, हमारे पाँओ को डगमगाने नहीं देता।

[10] क्यूँकि ऐ अल्लाह, तू ने हमें आज़माया। जिस तरह चाँदी को पिघला कर साफ़ किया जाता है उसी तरह तू ने हमें पाक-साफ़ कर दिया है।

[11] तू ने हमें जाल में फंसा दिया, हमारी कमर पर अज़ियतनाक बोझ डाल दिया।

[12] तू ने लोगों के रथों को हमारे सरों पर से गुज़रने दिया, और हम आग और पानी की ज़द में आ गए। लेकिन फिर तू ने हमें मुसीबत से निकाल कर फ़रावानी की जगह पहुँचाया।

[13] मैं भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ ले कर तेरे घर में आऊँगा और तेरे हुज़ूर अपनी मन्नतें पूरी करूँगा,

[14] वह मन्नतें जो मेरे मुँह ने मुसीबत के वक़्त मानी थीं।

[15] भस्म होने वाली क़ुर्बानी के तौर पर मैं तुझे मोटी-ताज़ी भेड़ें और मेंढों का धुआँ पेश करूँगा, साथ साथ बैल और बकरे भी चढ़ाऊँगा। (सिलाह)

[16] ऐ अल्लाह का ख़ौफ़ मानने वालो, आओ और सुनो! जो कुछ अल्लाह ने मेरी जान के लिए किया वह तुम्हें सुनाऊँगा।

[17] मैं ने अपने मुँह से उसे पुकारा, लेकिन मेरी ज़बान उस की तारीफ़ करने के लिए तय्यार थी।

[18] अगर मैं दिल में गुनाह की परवरिश करता तो रब मेरी न सुनता।

[19] लेकिन यक़ीनन रब ने मेरी सुनी, उस ने मेरी इल्तिजा पर तवज्जुह दी।

[20] अल्लाह की हम्द हो, जिस ने न मेरी दुआ रद्द की, न अपनी शफ़्क़त मुझ से बाज़ रखी।

ज़बूर — Chapters