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[1] आसफ़ का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : अह्द के सोसन। ऐ इस्राईल के गल्लाबान, हम पर ध्यान दे! तू जो यूसुफ़ की रेवड़ की तरह राहनुमाई करता है, हम पर तवज्जुह कर! तू जो करूबी फ़रिश्तों के दरमियान तख़्तनशीन है, अपना नूर चमका!

[2] इफ़्राईम, बिनयमीन और मनस्सी के सामने अपनी क़ुदरत को हरकत में ला। हमें बचाने आ!

[3] ऐ अल्लाह, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।

[4] ऐ रब, लश्करों के ख़ुदा, तेरा ग़ज़ब कब तक भड़कता रहेगा, हालाँकि तेरी क़ौम तुझ से इल्तिजा कर रही है?

[5] तू ने उन्हें आँसूओं की रोटी खिलाई और आँसूओं का प्याला ख़ूब पिलाया।

[6] तू ने हमें पड़ोसियों के झगड़ों का निशाना बनाया। हमारे दुश्मन हमारा मज़ाक़ उड़ाते हैं।

[7] ऐ लश्करों के ख़ुदा, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।

[8] अंगूर की जो बेल मिस्र में उग रही थी उसे तू उखाड़ कर मुल्क-ए-कनआन लाया। तू ने वहाँ की अक़्वाम को भगा कर यह बेल उन की जगह लगाई।

[9] तू ने उस के लिए ज़मीन तय्यार की तो वह जड़ पकड़ कर पूरे मुल्क में फैल गई।

[10] उस का साया पहाड़ों पर छा गया, और उस की शाख़ों ने देवदार के अज़ीम दरख़्तों को ढाँक लिया।

[11] उस की टहनियाँ मग़रिब में समुन्दर तक फैल गईं, उस की डालियाँ मशरिक़ में दरया-ए-फ़ुरात तक पहुँच गईं।

[12] तू ने उस की चारदीवारी क्यूँ गिरा दी? अब हर गुज़रने वाला उस के अंगूर तोड़ लेता है।

[13] जंगल के सूअर उसे खा खा कर तबाह करते, खुले मैदान के जानवर वहाँ चरते हैं।

[14] ऐ लश्करों के ख़ुदा, हमारी तरफ़ दुबारा रुजू फ़रमा! आसमान से नज़र डाल कर हालात पर ध्यान दे। इस बेल की देख-भाल कर।

[15] उसे मह्फ़ूज़ रख जिसे तेरे दहने हाथ ने ज़मीन में लगाया, उस बेटे को जिसे तू ने अपने लिए पाला है।

[16] इस वक़्त वह कट कर नज़र-ए-आतिश हुआ है। तेरे चेहरे की डाँट-डपट से लोग हलाक हो जाते हैं।

[17] तेरा हाथ अपने दहने हाथ के बन्दे को पनाह दे, उस आदमज़ाद को जिसे तू ने अपने लिए पाला था।

[18] तब हम तुझ से दूर नहीं हो जाएंगे। बख़्श दे कि हमारी जान में जान आए तो हम तेरा नाम पुकारेंगे।

[19] ऐ रब, लश्करों के ख़ुदा, हमें बहाल कर। अपने चेहरे का नूर चमका तो हम नजात पाएँगे।

ज़बूर — Chapters