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[1] ज़ियारत का गीत। मैं अपनी आँखों को पहाड़ों की तरफ़ उठाता हूँ। मेरी मदद कहाँ से आती है?

[2] मेरी मदद रब से आती है, जो आसमान-ओ-ज़मीन का ख़ालिक़ है।

[3] वह तेरा पाँओ फिसलने नहीं देगा। तेरा मुहाफ़िज़ ऊँघने का नहीं।

[4] यक़ीनन इस्राईल का मुहाफ़िज़ न ऊँघता है, न सोता है।

[5] रब तेरा मुहाफ़िज़ है, रब तेरे दहने हाथ पर सायबान है।

[6] न दिन को सूरज, न रात को चाँद तुझे ज़रर पहुँचाएगा।

[7] रब तुझे हर नुक़्सान से बचाएगा, वह तेरी जान को मह्फ़ूज़ रखेगा।

[8] रब अब से अबद तक तेरे आने जाने की पहरादारी करेगा।

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