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[1] रब की हम्द हो! ऐ मेरी जान, रब की हम्द कर।

[2] जीते जी मैं रब की सताइश करूँगा, उम्र भर अपने ख़ुदा की मद्हसराई करूँगा।

[3] शुरफ़ा पर भरोसा न रखो, न आदमज़ाद पर जो नजात नहीं दे सकता।

[4] जब उस की रूह निकल जाए तो वह दुबारा ख़ाक में मिल जाता है, उसी वक़्त उस के मन्सूबे अधूरे रह जाते हैं।

[5] मुबारक है वह जिस का सहारा याक़ूब का ख़ुदा है, जो रब अपने ख़ुदा के इन्तिज़ार में रहता है।

[6] क्यूँकि उस ने आसमान-ओ-ज़मीन, समुन्दर और जो कुछ उन में है बनाया है। वह हमेशा तक वफ़ादार है।

[7] वह मज़्लूमों का इन्साफ़ करता और भूकों को रोटी खिलाता है। रब क़ैदियों को आज़ाद करता है।

[8] रब अंधों की आँखें बहाल करता और ख़ाक में दबे हुओं को उठा खड़ा करता है, रब रास्तबाज़ को प्यार करता है।

[9] रब परदेसियों की देख-भाल करता, यतीमों और बेवाओं को क़ाइम रखता है। लेकिन वह बेदीनों की राह को टेढ़ा बना कर कामयाब होने नहीं देता।

[10] रब अबद तक हुकूमत करेगा। ऐ सिय्यून, तेरा ख़ुदा पुश्त-दर-पुश्त बादशाह रहेगा। रब की हम्द हो।

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