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[1] दाऊद का ज़बूर। ज़मीन और जो कुछ उस पर है रब का है, दुनिया और उस के बाशिन्दे उसी के हैं।

[2] क्यूँकि उस ने ज़मीन की बुन्याद समुन्दरों पर रखी और उसे दरयाओं पर क़ाइम किया।

[3] किस को रब के पहाड़ पर चढ़ने की इजाज़त है? कौन उस के मुक़द्दस मक़ाम में खड़ा हो सकता है?

[4] वह जिस के हाथ पाक और दिल साफ़ हैं, जो न फ़रेब का इरादा रखता, न क़सम खा कर झूट बोलता है।

[5] वह रब से बरकत पाएगा, उसे अपनी नजात के ख़ुदा से रास्ती मिलेगी।

[6] यह होगा उन लोगों का हाल जो अल्लाह की मर्ज़ी दरयाफ़्त करते, जो तेरे चेहरे के तालिब होते हैं, ऐ याक़ूब के ख़ुदा। (सिलाह)

[7] ऐ फाटको, खुल जाओ! ऐ क़दीम दरवाज़ो, पूरे तौर पर खुल जाओ ताकि जलाल का बादशाह दाख़िल हो जाए।

[8] जलाल का बादशाह कौन है? रब जो क़वी और क़ादिर है, रब जो जंग में ज़ोर-आवर है।

[9] ऐ फाटको, खुल जाओ! ऐ क़दीम दरवाज़ो, पूरे तौर पर खुल जाओ ताकि जलाल का बादशाह दाख़िल हो जाए।

[10] जलाल का बादशाह कौन है? रब्ब-उल-अफ़्वाज, वही जलाल का बादशाह है। (सिलाह)

ज़बूर — Chapters