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[1] ऐ अल्लाह, मेरा इन्साफ़ कर! मेरे लिए ग़ैरईमानदार क़ौम से लड़, मुझे धोकेबाज़ और शरीर आदमियों से बचा।

[2] क्यूँकि तू मेरी पनाह का ख़ुदा है। तू ने मुझे क्यूँ रद्द किया है? मैं अपने दुश्मन के ज़ुल्म के बाइस क्यूँ मातमी लिबास पहने फिरूँ?

[3] अपनी रौशनी और सच्चाई को भेज ताकि वह मेरी राहनुमाई करके मुझे तेरे मुक़द्दस पहाड़ और तेरी सुकूनतगाह के पास पहुँचाएँ।

[4] तब मैं अल्लाह की क़ुर्बानगाह के पास आऊँगा, उस ख़ुदा के पास जो मेरी ख़ुशी और फ़र्हत है। ऐ अल्लाह मेरे ख़ुदा, वहाँ मैं सरोद बजा कर तेरी सताइश करूँगा।

[5] ऐ मेरी जान, तू ग़म क्यूँ खा रही है, बेचैनी से क्यूँ तड़प रही है? अल्लाह के इन्तिज़ार में रह, क्यूँकि मैं दुबारा उस की सताइश करूँगा जो मेरा ख़ुदा है और मेरे देखते देखते मुझे नजात देता है।

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