Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 0:52

[1] ज़ियारत का गीत। जो रब पर भरोसा रखते हैं वह कोह-ए-सिय्यून की मानिन्द हैं जो कभी नहीं डगमगाता बल्कि अबद तक क़ाइम रहता है।

[2] जिस तरह यरूशलम पहाड़ों से घिरा रहता है उसी तरह रब अपनी क़ौम को अब से अबद तक चारों तरफ़ से मह्फ़ूज़ रखता है।

[3] क्यूँकि बेदीनों की रास्तबाज़ों की मीरास पर हुकूमत नहीं रहेगी, ऐसा न हो कि रास्तबाज़ बदकारी करने की आज़माइश में पड़ जाएँ।

[4] ऐ रब, उन से भलाई कर जो नेक हैं, जो दिल से सीधी राह पर चलते हैं।

[5] लेकिन जो भटक कर अपनी टेढ़ी-मेढ़ी राहों पर चलते हैं उन्हें रब बदकारों के साथ ख़ारिज कर दे। इस्राईल की सलामती हो!

ज़बूर — Chapters