Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 1:01

[1] रब की हम्द हो! ऐ रब के ख़ादिमो, रब के नाम की सताइश करो, रब के नाम की तारीफ़ करो।

[2] रब के नाम की अब से अबद तक तम्जीद हो।

[3] तुलू-ए-सुब्ह से ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब तक रब के नाम की हम्द हो।

[4] रब तमाम अक़्वाम से सरबुलन्द है, उस का जलाल आसमान से अज़ीम है।

[5] कौन रब हमारे ख़ुदा की मानिन्द है जो बुलन्दियों पर तख़्तनशीन है

[6] और आसमान-ओ-ज़मीन को देखने के लिए नीचे झुकता है?

[7] पस्तहाल को वह ख़ाक में से उठा कर पाँओ पर खड़ा करता, मुह्ताज को राख से निकाल कर सरफ़राज़ करता है।

[8] वह उसे शुरफ़ा के साथ, अपनी क़ौम के शुरफ़ा के साथ बिठा देता है।

[9] बाँझ को वह औलाद अता करता है ताकि वह घर में ख़ुशी से ज़िन्दगी गुज़ार सके। रब की हम्द हो!

ज़बूर — Chapters