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[1] रब की हम्द हो! ऐ रब के ख़ादिमो, रब के नाम की सताइश करो, रब के नाम की तारीफ़ करो।
[2] रब के नाम की अब से अबद तक तम्जीद हो।
[3] तुलू-ए-सुब्ह से ग़ुरूब-ए-आफ़्ताब तक रब के नाम की हम्द हो।
[4] रब तमाम अक़्वाम से सरबुलन्द है, उस का जलाल आसमान से अज़ीम है।
[5] कौन रब हमारे ख़ुदा की मानिन्द है जो बुलन्दियों पर तख़्तनशीन है
[6] और आसमान-ओ-ज़मीन को देखने के लिए नीचे झुकता है?
[7] पस्तहाल को वह ख़ाक में से उठा कर पाँओ पर खड़ा करता, मुह्ताज को राख से निकाल कर सरफ़राज़ करता है।
[8] वह उसे शुरफ़ा के साथ, अपनी क़ौम के शुरफ़ा के साथ बिठा देता है।
[9] बाँझ को वह औलाद अता करता है ताकि वह घर में ख़ुशी से ज़िन्दगी गुज़ार सके। रब की हम्द हो!
ज़बूर — Chapters
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