Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:42

[1] ऐ रास्तबाज़ो, रब की ख़ुशी मनाओ! क्यूँकि मुनासिब है कि सीधी राह पर चलने वाले उस की सताइश करें।

[2] सरोद बजा कर रब की हम्द-ओ-सना करो। उस की तम्जीद में दस तारों वाला साज़ बजाओ।

[3] उस की तम्जीद में नया गीत गाओ, महारत से साज़ बजा कर ख़ुशी के नारे लगाओ।

[4] क्यूँकि रब का कलाम सच्चा है, और वह हर काम वफ़ादारी से करता है।

[5] उसे रास्तबाज़ी और इन्साफ़ प्यारे हैं, दुनिया रब की शफ़्क़त से भरी हुई है।

[6] रब के कहने पर आसमान ख़ल्क़ हुआ, उस के मुँह के दम से सितारों का पूरा लश्कर वुजूद में आया।

[7] वह समुन्दर के पानी का बड़ा ढेर जमा करता, पानी की गहराइयों को गोदामों में मह्फ़ूज़ रखता है।

[8] कुल दुनिया रब का ख़ौफ़ माने, ज़मीन के तमाम बाशिन्दे उस से दह्शत खाएँ।

[9] क्यूँकि उस ने फ़रमाया तो फ़ौरन वुजूद में आया, उस ने हुक्म दिया तो उसी वक़्त क़ाइम हुआ।

[10] रब अक़्वाम का मन्सूबा नाकाम होने देता, वह उम्मतों के इरादों को शिकस्त देता है।

[11] लेकिन रब का मन्सूबा हमेशा तक कामयाब रहता, उस के दिल के इरादे पुश्त-दर-पुश्त क़ाइम रहते हैं।

[12] मुबारक है वह क़ौम जिस का ख़ुदा रब है, वह क़ौम जिसे उस ने चुन कर अपनी मीरास बना लिया है।

[13] रब आसमान से नज़र डाल कर तमाम इन्सानों का मुलाहज़ा करता है।

[14] अपने तख़्त से वह ज़मीन के तमाम बाशिन्दों का मुआइना करता है।

[15] जिस ने उन सब के दिलों को तश्कील दिया वह उन के तमाम कामों पर ध्यान देता है।

[16] बादशाह की बड़ी फ़ौज उसे नहीं छुड़ाती, और सूरमे की बड़ी ताक़त उसे नहीं बचाती।

[17] घोड़ा भी मदद नहीं कर सकता। जो उस पर उम्मीद रखे वह धोका खाएगा। उस की बड़ी ताक़त छुटकारा नहीं देती।

[18] यक़ीनन रब की आँख उन पर लगी रहती है जो उस का ख़ौफ़ मानते और उस की मेहरबानी के इन्तिज़ार में रहते हैं,

[19] कि वह उन की जान मौत से बचाए और काल में मह्फ़ूज़ रखे।

[20] हमारी जान रब के इन्तिज़ार में है। वही हमारा सहारा, हमारी ढाल है।

[21] हमारा दिल उस में ख़ुश है, क्यूँकि हम उस के मुक़द्दस नाम पर भरोसा रखते हैं।

[22] ऐ रब, तेरी मेहरबानी हम पर रहे, क्यूँकि हम तुझ पर उम्मीद रखते हैं।

ज़बूर — Chapters