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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तारदार साज़ों के साथ गाना है। ऐ मेरी रास्ती के ख़ुदा, मेरी सुन जब मैं तुझे पुकारता हूँ। ऐ तू जो मुसीबत में मेरी मख़्लसी रहा है मुझ पर मेहरबानी करके मेरी इल्तिजा सुन!

[2] ऐ आदमज़ादो, मेरी इज़्ज़त कब तक ख़ाक में मिलाई जाती रहेगी? तुम कब तक बातिल चीज़ों से लिपटे रहोगे, कब तक झूट की तलाश में रहोगे? (सिलाह)

[3] जान लो कि रब ने ईमानदार को अपने लिए अलग कर रखा है। रब मेरी सुनेगा जब मैं उसे पुकारूँगा।

[4] ग़ुस्से में आते वक़्त गुनाह मत करना। अपने बिस्तर पर लेट कर मुआमले पर सोच-बिचार करो, लेकिन दिल में, ख़ामोशी से। (सिलाह)

[5] रास्ती की क़ुर्बानियाँ पेश करो, और रब पर भरोसा रखो।

[6] बहुतेरे शक कर रहे हैं, “कौन हमारे हालात ठीक करेगा?” ऐ रब, अपने चेहरे का नूर हम पर चमका!

[7] तू ने मेरे दिल को ख़ुशी से भर दिया है, ऐसी ख़ुशी से जो उन के पास भी नहीं होती जिन के पास कस्रत का अनाज और अंगूर है।

[8] मैं आराम से लेट कर सो जाता हूँ, क्यूँकि तू ही ऐ रब मुझे हिफ़ाज़त से बसने देता है।

ज़बूर — Chapters