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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तारदार साज़ों के साथ गाना है। ऐ रब, ग़ुस्से में मुझे सज़ा न दे, तैश में मुझे तम्बीह न कर।

[2] ऐ रब, मुझ पर रहम कर, क्यूँकि मैं निढाल हूँ। ऐ रब, मुझे शिफ़ा दे, क्यूँकि मेरे आज़ा दह्शतज़दा हैं।

[3] मेरी जान निहायत ख़ौफ़ज़दा है। ऐ रब, तू कब तक देर करेगा?

[4] ऐ रब, वापस आ कर मेरी जान को बचा। अपनी शफ़्क़त की ख़ातिर मुझे छुटकारा दे।

[5] क्यूँकि मुर्दा तुझे याद नहीं करता। पाताल में कौन तेरी सताइश करेगा?

[6] मैं कराहते कराहते थक गया हूँ। पूरी रात रोने से बिस्तर भीग गया है, मेरे आँसूओं से पलंग गल गया है।

[7] ग़म के मारे मेरी आँखें सूज गई हैं, मेरे मुख़ालिफ़ों के हम्लों से वह ज़ाए होती जा रही हैं।

[8] ऐ बदकारो, मुझ से दूर हो जाओ, क्यूँकि रब ने मेरी आह-ओ-बुका सुनी है।

[9] रब ने मेरी इल्तिजाओं को सुन लिया है, मेरी दुआ रब को क़बूल है।

[10] मेरे तमाम दुश्मनों की रुस्वाई हो जाएगी, और वह सख़्त घबरा जाएंगे। वह मुड़ कर अचानक ही शर्मिन्दा हो जाएंगे।

ज़बूर — Chapters