Listen to this chapter • 1:04
[1] जब इस्राईल मिस्र से रवाना हुआ और याक़ूब का घराना अजनबी ज़बान बोलने वाली क़ौम से निकल आया
[2] तो यहूदाह अल्लाह का मक़्दिस बन गया और इस्राईल उस की बादशाही।
[3] यह देख कर समुन्दर भाग गया और दरया-ए-यर्दन पीछे हट गया।
[4] पहाड़ मेंढों की तरह कूदने और पहाड़ियाँ जवान भेड़-बकरियों की तरह फाँदने लगीं।
[5] ऐ समुन्दर, क्या हुआ कि तू भाग गया है? ऐ यर्दन, क्या हुआ कि तू पीछे हट गया है?
[6] ऐ पहाड़ो, क्या हुआ कि तुम मेंढों की तरह कूदने लगे हो? ऐ पहाड़ियो, क्या हुआ कि तुम जवान भेड़-बकरियों की तरह फाँदने लगी हो?
[7] ऐ ज़मीन, रब के हुज़ूर, याक़ूब के ख़ुदा के हुज़ूर लरज़ उठ,
[8] उस के सामने थरथरा जिस ने चटान को जोहड़ में और सख़्त पत्थर को चश्मे में बदल दिया।
ज़बूर — Chapters
11:0221:4631:1041:2752:1661:2272:3781:1693:08103:09111:12121:20130:55141:17150:57161:38172:49187:17192:16201:15211:55224:49230:53241:21252:48261:43272:35281:50291:35302:04314:20321:50332:42342:54354:44361:51375:43382:51392:33403:22412:03422:34431:04443:49452:40461:24471:13481:55492:59503:20512:54521:22531:17540:59553:33562:10571:45581:51592:58601:55611:07621:57631:34641:42652:24662:48670:50686:04695:31700:53713:49722:52733:51743:31751:27761:36772:357810:19792:08802:42812:11821:02832:20842:02851:54862:42871:03882:50897:16902:44912:15922:00930:56943:05951:39961:51971:46981:18991:351000:471011:211023:471033:061044:571056:061066:461075:261081:471094:131101:101111:361121:361131:011141:041152:191162:121170:221183:3211922:111200:521210:501221:031230:501241:031250:521261:031271:031280:481291:071301:021310:371322:331330:391340:241352:471363:191371:241381:201393:281401:561412:011421:211432:061442:171452:471461:281472:431481:521491:131500:56