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[1] दाऊद का ज़बूर। उस वक़्त जब उसे अपने बेटे अबीसलूम से भागना पड़ा। ऐ रब, मेरे दुश्मन कितने ज़्यादा हैं, कितने लोग मेरे ख़िलाफ़ उठ खड़े हुए हैं!

[2] मेरे बारे में बहुतेरे कह रहे हैं, “अल्लाह इसे छुटकारा नहीं देगा।” (सिलाह)

[3] लेकिन तू ऐ रब, चारों तरफ़ मेरी हिफ़ाज़त करने वाली ढाल है। तू मेरी इज़्ज़त है जो मेरे सर को उठाए रखता है।

[4] मैं बुलन्द आवाज़ से रब को पुकारता हूँ, और वह अपने मुक़द्दस पहाड़ से मेरी सुनता है। (सिलाह)

[5] मैं आराम से लेट कर सो गया, फिर जाग उठा, क्यूँकि रब ख़ुद मुझे सँभाले रखता है।

[6] उन हज़ारों से मैं नहीं डरता जो मुझे घेरे रखते हैं।

[7] ऐ रब, उठ! ऐ मेरे ख़ुदा, मुझे रिहा कर! क्यूँकि तू ने मेरे तमाम दुश्मनों के मुँह पर थप्पड़ मारा, तू ने बेदीनों के दाँतों को तोड़ दिया है।

[8] रब के पास नजात है। तेरी बरकत तेरी क़ौम पर आए। (सिलाह)

ज़बूर — Chapters