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[1] दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। तर्ज़ : गित्तीत। ऐ रब हमारे आक़ा, तेरा नाम पूरी दुनिया में कितना शानदार है! तू ने आसमान पर ही अपना जलाल ज़ाहिर कर दिया है।

[2] अपने मुख़ालिफ़ों के जवाब में तू ने छोटे बच्चों और शीरख़्वारों की ज़बान को तय्यार किया है ताकि वह तेरी क़ुव्वत से दुश्मन और कीनापर्वर को ख़त्म करें।

[3] जब मैं तेरे आसमान का मुलाहज़ा करता हूँ जो तेरी उंगलियों का काम है, चाँद और सितारों पर ग़ौर करता हूँ जिन को तू ने अपनी अपनी जगह पर क़ाइम किया

[4] तो इन्सान कौन है कि तू उसे याद करे या आदमज़ाद कि तू उस का ख़याल रखे?

[5] तू ने उसे फ़रिश्तों से कुछ ही कम बनाया, तू ने उसे जलाल और इज़्ज़त का ताज पहनाया।

[6] तू ने उसे अपने हाथों के कामों पर मुक़र्रर किया, सब कुछ उस के पाँओ के नीचे कर दिया,

[7] ख़्वाह भेड़-बकरियाँ हों ख़्वाह गाय-बैल, जंगली जानवर,

[8] परिन्दे, मछलियाँ या समुन्दरी राहों पर चलने वाले बाक़ी तमाम जानवर।

[9] ऐ रब हमारे आक़ा, पूरी दुनिया में तेरा नाम कितना शानदार है!

ज़बूर — Chapters